इस्लामाबाद: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में जब कोई देश अंदर से पूरी तरह खोखला हो जाता है तो वो अपनी नाकामी छिपाने के लिए दूसरों पर उंगली उठाने लगता है. बलोच लड़ाकों के हाथों लगातार पिट रही पाकिस्तानी सेना के साथ भी इस समय कुछ ऐसा ही हो रहा है. बलूचिस्तान से गुजरने वाले CPEC पर लगातार होते हमलों से परेशान चीन ने जब इस्लामाबाद का गला दबाया और फंडिंग रोकने की सीधी धमकी दी तो पाकिस्तानी फौज के मुखिया आसिम मुनीर के हाथ-पांव फूल गए. घबराहट और बेइज्जती को छिपाने के लिए मुनीर तुरंत बॉर्डर पर भागे और बिना किसी सबूत के भारत पर ठीकरा फोड़ते हुए ‘फितना-अल-हिंदुस्तान’ का पुराना राग अलापने लगे.
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बलूचिस्तान पर लाचार मुनीर
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने सुरक्षाबलों को ले जा रही जफर एक्सप्रेस को निशाना बनाकर एक बेहद सटीक और बड़ा धमाका किया था? इस धमाके ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की सुरक्षा व्यवस्था के दावों को पूरी तरह मटियामेट कर दिया. अपनी नाक कटते देख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तुरंत ईद-उल-अजहा के मौके पर बलूचिस्तान के झोब और क्वेटा इलाकों में फ्रंटलाइन जवानों से मिलने पहुंचे. वहां मुनीर ने अपनी फौज और एजेंसियों की कमियों को सुधारने या बलोच विद्रोहियों से निपटने की कोई ठोस रणनीति बनाने की जगह, सीधे इसे एक विदेशी साजिश करार दे दिया.
नाकामी छिपाने के लिए नया नाम ‘फितना-अल-हिंदुस्तान’
पाकिस्तानी सेना ने तो अब अपनी हर नाकामी पर पर्दा डालने के लिए एक नया शब्द ‘फितना-अल-हिंदुस्तान’ भी गढ़ लिया है. जब भी देश के भीतर कानून-व्यवस्था चरमराती है, रावलपिंडी के आला अफसर इस नए जुमले का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं. खुफिया एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि ये पाकिस्तानी सेना की दशकों पुरानी और घिसी-पिटी रणनीति है. जब भी वे घरेलू मोर्चे पर अपने ही लोगों को सुरक्षा देने में फेल होते हैं, तो जनता का गुस्सा शांत करने के लिए भारत का नाम जपने लगते हैं. इस बार भी मुनीर ने यही किया ताकि पाकिस्तानी आवाम फौज से उसकी नाकामी पर सवाल न पूछ सके.
बीजिंग ने इस बार इस्लामाबाद को बहुत अल्टीमेटम दिया है. चीन इस बात से बेहद भड़का हुआ है कि अरबों डॉलर के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के प्रोजेक्ट्स और वहां काम कर रहे चीनी इंजीनियरों की सुरक्षा करने में मुनीर आर्मी पूरी तरह फिसड्डी साबित हुई है.
चीन के गुस्से की वजह ये है कि उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ग्वादर इलाके में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरी तरह ठप हो गए हैं. अब बीजिंग ने साफ धमकी दे दी है कि अगर उसके लोगों को मुस्तैद सुरक्षा नहीं मिली तो वो भविष्य में मिलने वाला सारा फंड पूरी तरह रोक देगा. कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान के लिए ये किसी मौत के फरमान जैसा है.
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल की डरी हुई सेना
हालत तो देखिए आसिम मुनीर ने संविधान में बड़े बदलाव करवाकर खुद को फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज घोषित कर दिया है. उन्होंने देश की पूरी ताकत अपने हाथ में ले ली है और एक अघोषित तानाशाह बन चुके हैं लेकिन सेना की जमीनी हकीकत इस VIP ठाठ-बाठ के बिल्कुल उलट है.
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, बॉर्डर पर तैनात पाकिस्तानी फौजियों का हौसला इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. फ्रंट मोर्चों पर तैनात जवान खुद को बलूचिस्तान के पहाड़ों में बुरी तरह फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं. बलूचिस्तान अब मुनीर आर्मी के कंट्रोल से पूरी तरह बाहर निकल चुका है और भारत पर उंगली उठाना मुनीर की लाचारी को दिखाता है.





