देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank एक बार फिर चर्चा में है. इस बार मामला 45 करोड़ रुपये के कथित भुगतान और उससे जुड़े आंतरिक जांच का है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि बैंक के अंदर इस मामले को लेकर विजिलेंस जांच शुरू की गई है. हालांकि बैंक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसकी सभी प्रक्रियाएं तय नियमों और पारदर्शिता के साथ चलती हैं.

बैंक ने क्या कहा
बैंक के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि चुनिंदा दस्तावेजों और अधूरी जानकारी के आधार पर गलत निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं. बैंक का कहना है कि उसकी आंतरिक निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम काफी मजबूत हैं और किसी भी मामले में पूरी जांच और प्रक्रिया के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाता है.
इन खबरों का असर शेयर बाजार में भी दिखा. बुधवार को HDFC Bank Ltd के शेयर करीब 2.5 फीसदी तक गिर गए और दोपहर में यह लगभग 760 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया.
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क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक की ऑडिट कमेटी ने 45 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर औपचारिक इंटरनल विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन शुरू किया है. आरोप है कि यह रकम महाराष्ट्र सरकार की एजेंसी Maharashtra State Road Development Corporation (MSRDC) को अप्रत्यक्ष तरीके से दी गई.
बताया जा रहा है कि यह भुगतान डिफरेंशियल इंटरेस्ट यानी तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए किया गया था. लेकिन इसे सीधे ब्याज भुगतान के रूप में दिखाने के बजाय मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि बैंक ने चार स्थानीय वेंडर्स के जरिए रोड सेफ्टी जागरूकता अभियान के नाम पर यह भुगतान किया.





