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खाड़ी संकट का उड़ानों पर पड़ा असर, एअर इंडिया ने घरेलू रूट पर कम की उड़ान

मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी तनाव और फ्यूल के दाम में बढ़ोतरी तथा कमी का असर अब हवाई उड़ानों पर पड़ने लगा है. इस बीच एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया ने आज बुधवार को ऐलान किया कि कंपनी जून और अगस्त 2026 के बीच कुछ घरेलू रूटों पर उड़ान को अस्थायी रूप कम करने जा रही है. इससे पहले विमानन कंपनी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी बदलाव की घोषणा कर चुकी है.

खाड़ी संकट का उड़ानों पर पड़ा असर, एअर इंडिया ने घरेलू रूट पर कम की उड़ान
खाड़ी संकट का उड़ानों पर पड़ा असर, एअर इंडिया ने घरेलू रूट पर कम की उड़ान

कंपनी ने फ्यूल के दामों में लगातार वृद्धि और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े ऑपरेशनल दबावों के चलते उठाया है. कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “जून और अगस्त 2026 के बीच कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में हमारे पहले से घोषित बदलाव के बाद इसी अवधि के दौरान कुछ घरेलू रूटों पर भी ऑपरेशन को अस्थायी रूप से सीमित किया जा रहा है. इस वजह से कुछ चुनिंदा रूटों पर उड़ानों की संख्या (फ्रीक्वेंसी) में कमी की गई है. ये अहम बदलाव फ्यूल की ऊंची कीमतों की वजह से लगातार पड़ रहे असर की वजह से किया गया है.”

पूरे रिफंड का भी विकल्प

नई व्यवस्था को लेकर एअर इंडिया ने कहा है कि हालात सामान्य होने पर उड़ानों की संख्या फिर बढ़ाई जा सकती है. जिन यात्रियों की फ्लाइट प्रभावित होगी, उन्हें दूसरी उड़ानों में सीट देने की कोशिश की जाएगी. यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क तारीख बदलने या पूरा रिफंड लेने का विकल्प भी मिलेगा.

यह ताजा कदम एयरलाइन द्वारा 29 अंतरराष्ट्रीय रूटों पर अपनी उड़ानों को निलंबित करने और उनकी संख्या घटाने की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया है. ये फैसले एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती लागत, हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों और पश्चिम एशिया में तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट संकट से जुड़ी ऑपरेशनल बाधाओं की वजह से लिए गए हैं.

ऑपरेशन में लगातार बढ़ रही लागत

एअर इंडिया ने इससे पहले कहा था कि ये अस्थायी बदलाव ऑपरेशनल स्थिरता को बेहतर बनाने और यात्रियों को आखिरी समय पर होने वाली असुविधा को कम करने के मकसद से किया गया है, क्योंकि ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक विमानन बाजार में लगातार अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है.

कंपनी ने जेट फ्यूल की आसमान छूती कीमतों और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों के कारण रूट बदलने में आने वाली अतिरिक्त लागत का भी हवाला दिया. एयरलाइन ने उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई रूटों पर अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं या उनकी संख्या घटा दी है.

इन कई रूटों पर उड़ान संचालित

इसमें दिल्ली, मुंबई और चेन्नई को शिकागो, सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, पेरिस, सिंगापुर, बैंकॉक और मेलबर्न जैसे शहरों से जोड़ने वाले रूट भी शामिल हैं. इन कटौतियों के बावजूद, एयरलाइन कंपनी ने कहा कि वह 5 महाद्वीपों में हर महीने 1,200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करना जारी रखेगी.

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उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर की एयरलाइंस कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, संघर्ष वाले क्षेत्रों से रूट बदलने के कारण उड़ानों में लगने वाले अतिरिक्त समय और कुछ क्षेत्रों में यात्रा की मांग में आ रही कमी के कारण बढ़ते दबाव का सामना कर रही हैं. एअर इंडिया भी इस लंबे समय से चले आ रहे भू-राजनीतिक संकट के बीच अपने ऑपरेशनल खर्चों को नियंत्रित करने के लिए लागत-नियंत्रण के व्यापक उपायों पर विचार कर रही है.

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