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MP में आईजी की 16 साल की बेटी के सुसाइड से हड़कंप, घर पहुंचे IPS तो फांसी के फंदे से लटके मिली, जांच में ये सामने आया.!

खबर इंडिया की। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की नाबालिग बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।

MP में आईजी की 16 साल की बेटी के सुसाइड से हड़कंप, घर पहुंचे IPS तो फांसी के फंदे से लटके मिली, जांच में ये सामने आया.!
MP में आईजी की 16 साल की बेटी के सुसाइड से हड़कंप, घर पहुंचे IPS तो फांसी के फंदे से लटके मिली, जांच में ये सामने आया.!

जानकारी के मुताबिक, आईपीएस अधिकारी Sanjeev Kanchan की 17 वर्षीय बेटी ने 26 मई 2026 को अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। घटना उस समय हुई जब घर पर कोई मौजूद नहीं था। लड़की 11वीं कक्षा की छात्रा थी और पढ़ाई कर रही थी। जैसे ही घटना की जानकारी मिली, हबीबगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि मृतका आईपीएस अधिकारी की सगी बेटी नहीं थी। आईपीएस संजीव कंचन और उनकी पत्नी जज रेणुका कंचन ने करीब 16 साल पहले उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लिया था। परिवार में उनका एक बेटा भी है, जो मानसिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है।

पुलिस ने जब कमरे की तलाशी ली तो वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। छात्रा की किताबें, कॉपियां और निजी सामान भी खंगाले गए, लेकिन ऐसा कोई सुराग नहीं मिला जिससे आत्महत्या की वजह साफ हो सके। अब पुलिस इस केस को बेहद संवेदनशील मानकर जांच कर रही है।

बताया जा रहा है कि पुलिस छात्रा की सहेलियों, स्कूल के दोस्तों और करीबियों से पूछताछ कर रही है। इसके अलावा परिवार से भी बातचीत की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर वह किसी तनाव में थी या नहीं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं पढ़ाई का दबाव, मानसिक तनाव या कोई निजी परेशानी तो इस कदम की वजह नहीं बनी।

इस घटना के बाद इलाके में भी शोक का माहौल है। लोग हैरान हैं कि आखिर एक सामान्य दिखने वाले परिवार में ऐसा क्या हुआ कि 17 साल की लड़की ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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यह मामला एक बार फिर इस बात की तरफ इशारा करता है कि बच्चों की मानसिक स्थिति को समझना कितना जरूरी है। कई बार बच्चे अपनी परेशानियां खुलकर नहीं बता पाते और अंदर ही अंदर तनाव से जूझते रहते हैं। ऐसे में परिवार और करीबियों को बच्चों के व्यवहार पर लगातार नजर रखने और उनसे खुलकर बात करने की जरूरत है।

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