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रिजर्व बैंक की नीलामी में लगा बोलियों का अंबार! RBI के डॉलर-रुपया स्वैप ऑफर को मिला बंपर रिस्पॉन्स

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंगलवार को हुई डॉलर/रुपया खरीद/बिक्री स्वैप नीलामी को ज़बरदस्त रिस्पांस मिला, जिसमें घोषित राशि से लगभग दोगुनी बोलियां आईं. RBI के अनुसार, केंद्रीय बैंक को 9.80 बिलियन डॉलर की बोलियां मिलीं, लेकिन उसने 910 पैसे के कट-ऑफ प्रीमियम पर केवल 5 बिलियन डॉलर की बोलियाँ स्वीकार कीं. नीलामी की घोषित राशि 5 बिलियन डॉलर थी. विज्ञप्ति में कहा गया है कि RBI को नीलामी में 254 बोलियां मिलीं और उसने 144 बोलियां स्वीकार कीं. बिड-टू-कवर अनुपात 1.96 रहा.

रिजर्व बैंक की नीलामी में लगा बोलियों का अंबार! RBI के डॉलर-रुपया स्वैप ऑफर को मिला बंपर रिस्पॉन्स
रिजर्व बैंक की नीलामी में लगा बोलियों का अंबार! RBI के डॉलर-रुपया स्वैप ऑफर को मिला बंपर रिस्पॉन्स

दो फेज में होगी नीलामी

RBI ने बताया कि कट-ऑफ प्रीमियम पर प्रतिस्पर्धी बोलियों के प्रतिशत के रूप में आंशिक आवंटन 18.10 प्रतिशत रहा. नीलामी का पहला चरण 29 मई को होगा, और दूसरा चरण – जो कि फंड की वापसी का चरण है – 29 मई, 2029 को होगा. लेन-देन के पहले चरण में, बैंक नीलामी की तारीख के FBIL संदर्भ दर पर भारतीय रिज़र्व बैंक को अमेरिकी डॉलर बेचेंगे. स्वैप के पहले चरण का निपटान लेन-देन की तारीख से ‘ऑन-स्पॉट’ आधार पर होगा.

इसमें भारतीय रिज़र्व बैंक सफल बोलीदाता के चालू खाते में रुपये जमा करेगा, और बोलीदाता को RBI के नोस्ट्रो खाते में अमेरिकी डॉलर जमा करने होंगे. स्वैप लेन-देन के विपरीत चरण में, अमेरिकी डॉलर वापस पाने के लिए, रुपये को स्वैप प्रीमियम के साथ भारतीय रिजर्व बैंक को वापस करना होगा. RBI के आंकड़ों के अनुसार, 25 मई तक बैंकिंग प्रणाली में तरलता (liquidity) लगभग 67,285.42 करोड़ रुपये अधिशेष (surplus) में होने का अनुमान है.

रुपए को बचाने की कोशिश

यह स्वैप ऐसे समय में आया है जब सेंट्रल बैंक, फॉरेक्स रिजर्व से डॉलर बेचकर, तेजी से कमजोर होते रुपए को बचाने की कोशिश कर रहा है. इस तरह के कदम से देश के बैंकिंग सिस्टम से रुपये की लिक्विडिटी कम हो सकती है और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं. शुक्रवार को होने वाले स्वैप के शुरुआती चरण के सेटलमेंट के जरिए, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैंकिंग सिस्टम में रुपए की लिक्विडिटी वापस डालेगा. यह स्वैप तीन साल बाद उलट दिया जाएगा. मई महीने में अब तक, भारत के बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस औसतन 2 ट्रिलियन रुपए (20.93 बिलियन डॉलर) से कम रहा है, जो कुल जमा का 0.8 फीसदी से भी कम है.

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रिकॉर्ड लेवल पर गिरा था रुपया

भारतीय करेंसी लगातार नए रिकॉर्ड निचले स्तरों पर गिरी है, जिसमें पिछले हफ्ते 1 डॉलर के मुकाबले 96.96 का अब तक का सबसे निचला स्तर भी शामिल है. सेंट्रल बैंक के दखल और तेल की कीमतों में गिरावट के चलते यह कुछ सुधरकर लगभग 95.50 के स्तर पर पहुंच गई. इस बीच, बॉन्ड यील्ड कर्व सपाट हो गया, क्योंकि छोटी अवधि की दरों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पहले ही शामिल हो गई थी—शायद जून में ही—जबकि लंबी अवधि की दरों में अभी इन उम्मीदों का असर दिखना बाकी था. नीलामी के नतीजों की घोषणा के बाद, लंबी अवधि के डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम में गिरावट आई. तीन साल का फॉरवर्ड प्रीमियम आखिरी बार 9 रुपये पर था, जो नतीजों से पहले के लगभग 9.25 रुपए के स्तर से कम था.

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