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विदेशी डंपिंग को रोककर भारत बचाएगा ₹28,540 करोड़, घरेलू बाजार और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी नई ताकत

एक नई शोध रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत सस्ते विदेशी सामानों की बाढ़ (विशेषकर चीन और अन्य देशों से होने वाली डंपिंग) को रोकने के लिए रणनीतिक रूप से डंपिंग-रोधी शुल्क लागू करता है, तो देश को हर साल ₹28,540 करोड़ की विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो (खर्च) को बचाने में मदद मिलेगी. इस शुल्क के लगने से विदेशी उत्पाद भारतीय बाजारों में स्थानीय स्तर पर बनने वाले सामानों से सस्ते नहीं बिक पाएंगे. भारत में अनुशंसित डंपिंग-रोधी शुल्क लागू नहीं किए जाने से घरेलू उद्योग को सालाना 11,938 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.वहीं इन शुल्कों को लागू करने से आयात में आने वाली कमी से हर साल 28,540 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है. मंगलवार को यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई.

विदेशी डंपिंग को रोककर भारत बचाएगा ₹28,540 करोड़, घरेलू बाजार और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी नई ताकत
विदेशी डंपिंग को रोककर भारत बचाएगा ₹28,540 करोड़, घरेलू बाजार और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी नई ताकत

हो रहा है देश को नुकसान

वाणिज्य मंत्रालय के तहत संचालित व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) सस्ते माल को भारत में खपाने (डंपिंग) की जांच करता है, जबकि इन शुल्कों को लागू करने का अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय लेता है. सी-डीईपी रिसर्च और सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ स्टडीज की इस रिपोर्ट के मुताबिक, डीजीटीआर द्वारा 56 उत्पादों पर अनुशंसित डंपिंग-रोधी शुल्क लागू नहीं होने से यह नुकसान हो रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि इन शुल्कों को लागू किया जाए तो घरेलू विनिर्माता आयात की जगह मांग पूरी कर सकेंगे, जिससे विदेशी मुद्रा की खासी बचत होगी.

क्या कहती है स्टडी?

रिपोर्ट के मुताबिक, 33 उत्पादों के अध्ययन में पाया गया कि सस्ते आयात के कारण वर्तमान में करीब 1.54 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है, जो 2030 तक बढ़कर 2.70 लाख करोड़ रुपये हो सकता है. इसी अवधि में रोजगार हानि भी लगभग 24,000 से बढ़कर 38,000-42,000 तक पहुंचने का अनुमान है. डंपिंग-रोधी शुल्क ऐसे उपाय हैं, जिनका उपयोग सरकारें घरेलू उद्योग को विदेशी कंपनियों द्वारा कम कीमत पर की जाने वाली बिक्री से बचाने के लिए करती हैं. डंपिंग तब होती है, जब कोई उत्पाद अपने घरेलू बाजार की तुलना में कम कीमत पर दूसरे देश में निर्यात किया जाता है.

डीजीटीआर की सिफारिशें

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में डीजीटीआर की सिफारिशों को लागू करने के रुझान में बदलाव आया है. वर्ष 2020 तक जहां लगभग 99.5 प्रतिशत सिफारिशें लागू हो जाती थीं, वहीं नवंबर, 2025 से अप्रैल, 2026 के बीच सिफारिशों को अस्वीकार किए जाने की दर बढ़कर 81 प्रतिशत हो गई, जो इससे पहले अप्रैल-नवंबर, 2025 में 16 प्रतिशत थी.

Khabar Monkey

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में डंपिंग-रोधी शुल्क औसतन 16.26 वर्षों तक लागू रहते हैं, जबकि भारत में यह अवधि करीब 6.97 वर्ष है. रिपोर्ट कहती है कि इन शुल्कों को समय पर लागू करना घरेलू उद्योग की क्षमता और निवेश को बनाए रखने के लिए आवश्यक है.

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