नौतपा का अर्थ होता है ‘नौ दिनों की तपीश’ जो 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। नौतपा में तापमान बढ़ जाता है, गर्मी तेज पड़ने लगती है, लू चलने लगती है और सूरत की किरणें तेज हो जाती हैं। इसे दौरान बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, खासकर दोपहर के समय। सुबह 7-8 बजे से लेकर शाम के 5-6 बजे तक तापमान काफी अधिक रहता है। लेकिन क्या आपको पता है कि नौतपा क्या होता है और इसको लेकर धार्मिक मान्यताएं क्या हैं। किसानों के लिए 9 दिनों तक भीषण गर्मी पड़नी क्यों जरूरी है। आइए विस्तार से इस बारे में जानते हैं:

सनातन धर्म में ऋतु परिवर्तन का महत्व
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि सनातन धर्म में प्रकृति ऋतु परिवर्तन और ग्रह-नक्षत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हें केवल भौतिक तत्व नहीं, बल्कि जीवन और सृष्टि के संतुलन का आधार माना जाता है। वेद-पुराणों में मनुष्य को प्रकृति का हिस्सा माना गया है, इसलिए पेड़-पौधे, सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों की गतिविधियों का सीधा संबंध हमारी जीवन से जोड़ा गया है। भारती संस्कृति में माना गया है कि प्रकृति पंचतत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से मिलकर बनी है और हमारा शरीर भी इन्हीं तत्वों से मिलकर बना है। यही वजह है कि मौसम बदलने पर शरीर, मन और हमारी दिनचर्या पर भी प्रभाव पड़ता है। आयुर्वेद में तो ऋतु परिवर्तन के बारे में खास तरह से बताया गया है। इस दौरान स्वस्थ और बेहतर जीवन के लिए खान पान और जीवन शैली में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। गर्मी, ठंडी, बरसात या फिर क्यों न नौतपा हो हर में आयुर्वेद जीवन शैली और खान पान में बदलाव की सलाह देता है। ज्योतिष शास्त्र में भी नौतपा का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यता
सूर्य जब धरती के करीब आता है तो तापमान बढ़ जाता है, जिससे गर्मी अधिक पड़ने लगती है। ज्योतिष शास्त्र में इसे सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करना बताया गया है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पहुंचती है। हालांकि, सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों तक रहते हैं लेकिन शुरुआती नौ दिनों तक सबसे ज्यादा प्रभाव रहता है। इसके बाद धीरे-धीरे प्रभाव कम होने लगता है।
किसानों के लिए क्यों जरूरी है नौतपा में भीषण गर्मी
भारतीय पुराने समय से ही गर्मी, ठंडी और बारिश का अनुमान लगाने के लिए कई तरह के देसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। सूर्य को देखकर समय का पता लगाना, टिटहरी पक्षी के अंडे से मानसून का अनुमान लगाना। इसी तरह छोटी-छोटी चीजों से मौसम बदलने का अनुमान गाया जाता है। नौतपा भी इसमें शामिल है। यह किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। नौतपा की गर्मी के आधार पर किसान मानसूनी बारिश का अनुमान लगाते हैं। कहा जाता है कि इन नौ दिनों में जितनी अधिक तपन होगी मानसून उतना ही अच्छा रहेगा। किसान नौतपा के अनुसार ही मानसून का अंदाजा लगाते हैं और इसी के अनुसार खेती और किसानी करते हैं। नौतपा में चूहे, कीड़े-मकोड़े और टिड्डी बड़ी संख्या में मरते हैं, जिसके चलते किसानों की फसल सुरक्षित रहती है। इसका अप्रत्यक्ष रूस से खेती से कनेक्शन जोड़ा जाता है।
नौतपा में क्या करें और क्या न करें
Khabar Monkey
जो भी काम हो सुबह जल्दी करें या फिर शाम को करें।
शरीर में पानी की कमी न होने दें।
इस दौरान तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और सत्तू का सेवन अधिक करना चाहिए।
इस दौरान हल्का भोजन करना चाहिए
ज्योतिष शास्त्र में नौतपा को सेवा, दान और आत्मशुद्धि का समय माना गया है। इस दौरान जलदान का विशेष महत्व है।
पशु-पक्षियों के लिए साफ पानी और दाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
नौतपा में क्या नहीं करना चाहिए
दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीधी धूप में निकलने से बचना चाहिए।
बाहर निकलते वक्त सिर और कान को सूती कपड़े या छाते से ढककर निकलें।
इन नौ दिनों में मांस और शराब के सेवन से बचना चाहिए।
नौ दिनों तक मसालेदार, तला भुना, बासी या भारी भोजन करने से बचना चाहिए।





