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अभी कितनी बार बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! जानकर लगेगा जोर का झटका

विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी अभी थमने वाली नहीं है और आने वाले दिनों में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि हाल ही में की गई लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि तेल कंपनियों (ओएमसी) के भारी घाटे की पूरी तरह भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अभी कितनी बार बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! जानकर लगेगा जोर का झटका
अभी कितनी बार बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! जानकर लगेगा जोर का झटका

1. क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक सेहुल भट्ट ने एक मीडिया संस्थान को बताया कि हालिया बढ़ोतरी कंपनियों के मार्जिन को बहाल करने के बजाय केवल उनके बैलेंस शीट के दबाव को कम करने के लिए है। उन्होंने इसे एक तरह की नीतिगत स्वीकृति बताया है कि जो लागत कंपनियों ने झेली है, उसका असर अंततः कीमतों पर दिखना ही था।

2. वाणिज्यिक बैंकिंग कंपनी इक्रा (आईसीआरए) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड (कॉर्पोरेट रेटिंग्स) प्रशांत वशिष्ठ ने हाल ही में कहा था कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी मामूली है। उनका अनुमान है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें (105-110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास) ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों को खुदरा कीमतों पर फिर से विचार करना होगा।
3. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब तक ब्रेंट क्रूड तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के काफी नीचे आकर लंबे समय तक स्थिर नहीं हो जाते, तब तक कीमतों में पांचवीं बार बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है। दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने भी भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी बेहद जटिल समस्याओं को लेकर आगाह किया है।

सरकार इस तेज बढ़ोतरी से निपटने के लिए क्या योजना बना रही है?
1. किस्तों में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी
केंद्र सरकार इस ईंधन संकट और कीमतों में तेज बढ़ोतरी से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपना रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था और आम जनता पर बुरा असर पड़ सकता था। इसलिए सरकार धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाकर महंगाई दर पर इसके प्रभाव पर लगातार नजर रख रही है।

2. उत्पाद शुल्क में भारी कटौती
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के महंगे के असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने उत्पाद शुल्क में बड़ी कटौती की है। मार्च के अंत में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी, जिससे सरकारी खजाने को सालाना करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये की कमी होगी।
3. राज्यों से वैट कम करने का आग्रह
केंद्र सरकार की तरफ से एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद अब उन राज्य सरकारों पर वैट कम करने का दबाव भी डाला जा रहा है, जो अभी भी 30% तक का भारी टैक्स वसूल रहे हैं।
4. ईंधन संरक्षण की अपील
देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और आयात बिल को कम करने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचाने की विशेष अपील भी की है। उन्होंने लोगों से कार पूलिंग अपनाने, सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने और अनावश्यक यात्राओं से बचने का आग्रह किया है।

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5. राशनिंग पर सरकार का रुख
भले ही दुनिया के कई देशों में संकट के कारण ईंधन की राशनिंग शुरू हो गई हो, लेकिन भारत सरकार की फिलहाल पेट्रोल और डीजल की राशनिंग करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस (एलपीजी) की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी की आपूर्ति में कुछ हद तक राशनिंग की गई है।

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