
कई लोग सोचते है कि अंधेरा होते ही लोगों का मेटाबॉलिज्म स्लो पड़ जाता है. पर सच ये है कि रात में शरीर का काम करने का तरीका थोड़ा बदलता है और कुछ आदतें भी इसे और स्लो बना देती हैं. मेटाबॉलिज्म ऐसी प्रक्रिया है जो शरीर में खाना पचाकर एनर्जी बनाता है. दिन में लोग ज्यादादा एक्टिव रहते हैं इसलिए शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न होती है. रात में जब लोग आराम करते हैं तो शरीर की जरूरत कम हो जाती है इसलिए मेटाबॉलिज्म थोड़ा धीमा हो जाता है. ये एक नेचुरल प्रोसेस है लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब लोगों के खाने की आदतें गलत हो जाती हैं. अंधेरा अपने आप वजन नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी लाइफस्टाइल जिम्मेदार होती है.
जंक फूड स्लो मेटाबॉलिज्म की सबसे बड़ी वजह है देर रात तक जग कर जंक फूड खाना. जब आप सोने से ठीक पहले तला भुना या ज्यादा मीठा खा लेते हैं तो शरीर उसे ठीक से पचा नहीं पाता है. इससे फैट स्टोर होने लगता है और वजन बढ़ने लगता है. रात में चिप्स, मिठाई या कोल्ड ड्रिंक की क्रेविंग भी कैलोरी बढ़ा देती है. कई बार रात में खाए गए जंक की वजह से अगले दिन गैस और ब्लोटिंग की समस्या होने लगती है.
नींद फैट गेन करने में नींद की कमी भी बेहद बड़ा कारण है. कम सोने से हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं जिससे भूख ज्यादा लगती है. देर तक मोबाइल चलाना और सोने का कोई फिक्स टाइम ना होना मेटाबॉलिज्म पर असर डालता है. शरीर को सही आराम नहीं मिलता है और वजन धीरे धीरे बढ़ने लगता है. बहुत से लोग जो नाइट शिफ्ट की जॉब करते हैं उनमें ये दिक्कत काफी ज्यादा देखने को मिलती है.
एक्टिविटी रात में फिजिकल एक्टिविटी कम होने से भी सेहत पर काफी फर्क पड़ता है. अगर आप दिनभर बैठकर काम करते हैं और रात में भी तुरंत सो जाते हैं तो कैलोरी बर्न कम होती है जिससे लोगों का मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है. इसलिए हर समय खाना खाने के बाद हल्की वॉक या स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद रहता है.
अपनाएं हेल्दी आदतें कुछ आसान आदतें अपनाकर आप स्लो मेटाबॉलिज्म की समस्या से बच सकते हैं. रात का खाना हल्का और समय पर खाएं. सोने से दो घंटे पहले डिनर खत्म कर लें. ज्यादा मीठा और तला खाना रात में न खाएं. रोज सात से आठ घंटे की नींद लें. दिन में थोड़ी एक्सरसाइज जरूर करें.





