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वोडाफोन-आइडिया का शेयर 1 महीने में 44% उछला, अब इसे खरीदें, बेचें या रखे रहें? ये है एक्सपर्ट की राय

कभी बाजार में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vi) के शेयरों ने पिछले डेढ़ महीने में ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि बड़े-बड़े दिग्गज हैरान हैं. अप्रैल 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक कंपनी का शेयर करीब 61% की छलांग लगाकर अपने 52 हफ्तों के नए शिखर पर पहुंच चुका है. अगर सिर्फ पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसने निवेशकों की पूंजी को 44% तक बढ़ा दिया है. फिलहाल यह शेयर अपने साल के सबसे ऊंचे स्तर के बेहद करीब 13.71 रुपये पर कारोबार कर रहा है. ऐसे में बाजार के आम निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस तेजी की बहती गंगा में हाथ धो लेना चाहिए, मुनाफा समेटकर बाहर निकल जाना चाहिए या फिर अभी कुछ समय के लिए होल्ड करना सही रहेगा.

वोडाफोन-आइडिया का शेयर 1 महीने में 44% उछला, अब इसे खरीदें, बेचें या रखे रहें? ये है एक्सपर्ट की राय
वोडाफोन-आइडिया का शेयर 1 महीने में 44% उछला, अब इसे खरीदें, बेचें या रखे रहें? ये है एक्सपर्ट की राय

इन 3 कारणों से पलटी वोडाफोन आइडिया की किस्मत

बाजार के जानकारों का साफ कहना है कि वोडाफोन आइडिया के शेयरों में आई यह तूफानी तेजी कोई तुक्का नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ बेहद मजबूत वजहें काम कर रही हैं. सबसे बड़ी राहत कंपनी को सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) से मिली है, जिसने कंपनी की एजीआर (AGR) देनदारियों में करीब 27% की भारी-भरकम कटौती कर दी है. इस एक फैसले ने कंपनी के सिर से नकदी के बहुत बड़े बोझ को कम कर दिया है. सरकार से हरी झंडी मिलते ही कंपनी के प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप ने भी इस पर अपना भरोसा जताया और अपनी सिंगापुर की इकाई के जरिए कंपनी में 4,730 करोड़ रुपये के नए निवेश का बड़ा एलान कर दिया. इसके साथ ही, अब बैंकों से भी कंपनी को जल्द ही नया कर्ज मिलने की उम्मीद जग गई है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया है.

मुनाफे के आंकड़ों के पीछे छुपा असली गणित

कंपनी छोड़कर जाने वाले ग्राहकों की संख्या में कमी आई है और प्रति ग्राहक होने वाली औसत आय (ARPU) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यही वजह है कि रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) ने कंपनी के आउटलुक को ‘स्टेबल’ से अपग्रेड करके ‘पॉजिटिव’ की श्रेणी में डाल दिया है. वित्तीय मोर्चे पर बात करें तो मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही में वोडाफोन आइडिया ने 51,970 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा कमाया है. हालांकि, यहां आम निवेशकों को एक बारीक बात समझनी होगी कि यह छप्परफाड़ मुनाफा कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज से नहीं आया है, बल्कि एजीआर देनदारियों के पुनर्मूल्यांकन से मिले एकमुश्त अकाउंटिंग लाभ के कारण दिखाई दे रहा है. अगर कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू को देखें, तो यह सालाना आधार पर सिर्फ 3% बढ़कर 11,332 करोड़ रुपये रहा है.

क्या कह रहे दिग्गज ब्रोकरेज हाउस

तमाम अच्छी खबरों के बावजूद वोडाफोन आइडिया के आगे का सफर पूरी तरह से कांटों से मुक्त नहीं हुआ है. रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी बेहद मजबूत और आर्थिक रूप से सक्षम कंपनियों से मिल रही सीधी चुनौती, भारी-भरकम कर्ज का बोझ और देश भर में 5G नेटवर्क का विस्तार करने के लिए लगने वाली भारी-भरकम पूंजी जैसी बड़ी चुनौतियां आज भी जस की तस खड़ी हैं. यही वजह है कि देश-विदेश के बड़े ब्रोकरेज हाउसेज इस शेयर को लेकर एक राय नहीं बना पा रहे हैं.

विदेशी ब्रोकरेज फर्म सिटी (Citi) इस शेयर को लेकर काफी उत्साहित दिख रही है और उसने ‘Buy’ यानी खरीदने की रेटिंग बरकरार रखते हुए 14 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है. सिटी का मानना है कि प्रमोटर्स की नई पूंजी और एजीआर बकाये में कटौती से कंपनी की वित्तीय हालत में सुधार हुआ है, हालांकि उन्होंने इसे अभी भी हाई-रिस्क कैटेगरी में ही रखा है.

दूसरी तरफ, नोमुरा (Nomura) और जेपी मॉर्गन (JPMorgan) जैसी दिग्गज फर्में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं. उनका मानना है कि आने वाले समय में कंपनी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बैंकों से पर्याप्त फंडिंग जुटाने और प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने के लिए नेटवर्क मजबूत करने की होगी.

सीएलएसए, नुवामा, मोतीलाल ओसवाल और एक्सिस कैपिटल जैसे अन्य ब्रोकरेज भी फिलहाल इस शेयर को लेकर बहुत ज्यादा आक्रामक दांव खेलने के पक्ष में नहीं हैं और ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने को कह रहे हैं.

Khabar Monkey

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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