टीनएज एक ऐसा फेज होता है जब बच्चा युवावस्था की तरफ बढ़ रहा होता है. इस टाइम उसमें हार्मोनल चेंज भी हो रहे होते हैं, इस वजह से वह शारीरिक बदलावों के साथ ही मानसिक चेंजेस से भी बदल रहा होता है. खासकर लड़कियों के लिए ये टाइम थोड़ा सा ज्यादा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उनमें मेंटल-फिजिकल चेंज होने के साथ ही पीरियड्स साइकिल भी शुरू हो जाती है. इसी वजह से उनमें लड़कों के मुकाबले ज्यादा भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने के मिलते हैं. पेरेंट्स को इस दौरान खासककर ध्यान रखना चाहिए. इस आर्टिकल में हम जानेंगे ऐसी 4 चीजों के बारे में जो टीनएज उम्र की लड़कियों के माता-पिता को उनके दोस्त बनकर समझनी चाहिए.

टीनएज में बच्चों में अक्सर भावनाएं बहुत ही वाइब्रेंट होती हैं. कुछ देर में तो वो बहुत खुश होते हैं तो कुछ ही देर में वो बहुत ही आक्रामक हो जाते हैं. लड़कियों को कुछ चीजों के बारे में तो बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती है और वो इसे शेयर करने से भी घबराती हैं. चलिए जान लेते हैं कि पेरेंट्स को कौन सी 4 बातें बेटियों के दोस्त बनकर सुननी और समझनी चाहिए.
बॉडी में चेंजेस आना
लड़कियों के शरीर में टीनएज टाइम में तेजी से बदलाव आते हैं. जैसे वेट बढ़ना, शरीर के बनावट में बदलाव होना और चेहरे पर एक्ने होना. इन सारे बदलावों को कई बार वो स्वीकार नहीं कर पाती हैं. इस वजह से उन्हें असहज महसूस हो सकता है. इस बारे में वो बात नहीं कर पाती हैं और कॉन्फिडेंस में कमी आ सकती है.
किशोरावस्था से गुजर रही बेटियों से माता-पिता अगर दोस्तों की रह बात करेंगे तो वो खुलकर उन्हें इस बारे में बता पाएंगी. कई बार मजाक में लोग फैमिली में कुछ ऐसा कह देते हैं जिससे बच्चे का कॉन्फिडेंस हिल सकता है. खासकर मां इस दौरान बेटियों की दोस्त बन सकती हैं और उन्हें शरीर में होने वाले इन स्वाभाविक बदलावों के बारे में जागरूक कर सकती हैं.
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परफेक्ट होने का प्रेशर
आज के सोशल मीडिया के दौर में अच्छा दिखने की होड़ लड़के और लड़कियों दोनों में ही रहती है, लेकिन खासकर लड़कियों से ये उम्मीद की जाती है कि वो बढ़ती उम्र में हर चीज तेजी से सीख लें. जैसे वो भावनात्मक रूप से परिपक्व यानी मेच्योर हो जाएं. घर के काम सीख जाएं. उनके रंग, बॉडी टाइम को लेकर लोग दुनियाभर की सलाह देने लगते हैं. ऐसे में आप अपनी बेटी को तभी सहज महसूस करवा पाएंगे जब उनके दोस्त की तरह भावनाओं को समझेंगे.
प्राइवेस की समझें
टीनएज में बच्चे नए लोगों और नई चीजों के बारे में समझने के लिए बहुत जिज्ञासु होते हैं. भारतीय घरों में आज भी लड़कियों को उतना स्पेस नहीं मिल पाता है, क्योंकि सभी लोग काफी प्रोटेक्टिव होते हैं. कई बार आपकी ये आदत टीनएज बेटी के लिए बहुत खीझ से भर सकती है और वो आपसे दूर हो सकती है. जरूरी है कि आप इस सिचुएशन को समझदारी से हैंडल करें. आप उन्हें रोकने टोकने की जगह की दोस्त की तरह उनसे चीजों को लेकर शांति से बात करें. उनकी प्राइवेसी को समझने की कोशिश करें.
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सेफ्टी के बारे में जागरुकता जरूरी
लड़कियां जब बड़ी होना शुरू करती हैं तो उन्हें रोकना-टोकना शुरू कर देते हैं जैसे किसी से बहुत ज्यादा बात नहीं करना है. ज्यादा बाहर मत घूमों. ऐसी चीजें आपकी टीनएज बेटी को स्ट्रेस में ला सकती है. जरूरी है कि आप अपनी बेटी को जागरुक करें. ये तभी हो सकता है जब बिल्कुल फ्रेंड्स की तरह बात करेंगे. उन्हें बताएं कि सोशल मीडिया पर क्या सावधानी रखनी होती है. कौन से दोस्त सही होते हैं और आप किसी भी हालात में उनके साथ रहेंगे. इसके अलावा आप सेल्फ डिफेंस के तरीके भी अपनी बेटी को सिखा सकते हैं. इससे उनका कॉन्फिडेंस बूस्ट होगा.





