अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने शनिवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात की. यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के रिश्ते व्यापारिक टैरिफ, पाकिस्तान और चीन को लेकर बढ़ती चिंताओं की वजह से दबाव में हैं. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक हालात पर विस्तार से चर्चा हुई.

ऊर्जा सहयोग पर अमेरिका का जोर
बैठक के दौरान रुबियो ने कहा कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाए. अमेरिका का मानना है कि ईरान युद्ध के बाद पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए अमेरिकी तेल और गैस बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं. रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा बाजार को ईरान के प्रभाव में नहीं आने देगा. हाल के महीनों में भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बढ़ने से अमेरिका की चिंता भी बढ़ी है.
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टैरिफ विवाद से बिगड़े रिश्ते
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यकाल में भारत पर भारी टैरिफ लगाए गए थे, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया था. हालांकि बाद में एक अंतरिम समझौते के तहत कई शुल्कों में राहत दी गई, लेकिन अब तक व्यापक व्यापार समझौता नहीं हो पाया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार समझौते में देरी दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल रही है. वहीं अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां भी भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं.
क्वाड और व्हाइट हाउस दौरे पर चर्चा
बैठक में रुबियो ने ट्रंप की ओर से मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया. साथ ही अगले सप्ताह भारत में होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक को लेकर भी चर्चा हुई. क्वाड समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं.
भारत ने बातचीत के दौरान एक बार फिर शांतिपूर्ण कूटनीति और संवाद के जरिए वैश्विक विवादों को सुलझाने की बात दोहराई. विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.





