पीएम मोदी इंडाेनेशिया की यात्रा पर हैं. वो इंडाेनेशिया जिसका झंडा मोनाको से विवाद की वजह बना था. विवाद की खबरें दुनियाभर में सुर्खियां बनी थीं. इंडाेनेशिया और मोनाको का झंडा देखेंगे तो उसमें बमुश्किल ही फर्क कर पाएंगे. दोनों ही देशों के झंडे में दो पट्टियां हैं. ऊपर की तरफ लाल और नीचे सफेद. अब सवाल है कि दो देशों के पास एक जैसा झंडा क्यों और कैसे? इस लाल और सफेद झंडे का इस्तेमाल सबसे पहले किसने किया?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए पहले मोनाको की कहानी समझनी होगी. आधिकारिकतौर पर मोनाको ने 4 अप्रैल, 1881 को राजकुमार चार्ल्स तृतीय के शासनकाल के दौर में यह झंडा अपनाया, जिसमें लाल और सफेद पट्टियां थीं. यह झंडा 14वीं शताब्दी के शासक राजवंश के प्रतीक को दर्शाता है.इंडोनेशिया ने आजादी की घोषणा करते हुए 17 अगस्त, 1945 को आधिकारिकतौर पर लाल और सफेद झंडा फहराया और इस अपनाने पर मुहर लगाई. यहीं से विवाद की नींव पड़ी.

मोनाको की आपत्ति पर भी इंडोनेशिया क्यों डटा रहा?

जब इंडोनेशिया ने यह झंडा अपनाया तो बात मोनाको तक पहुंची. मोनाको का तर्क था कि भ्रम से बचने के लिए इंडोनेशिया को एक अलग डिज़ाइन चुनना चाहिए था, लेकिन इंडोनेशिया अपने झंडे पर डटा रहा है. इस फैसले के पीछे कई तर्क दिए गए. दावा किया गया कि इंडोनेशिया के लाल और सफेद झंडे के पीछे ऐतिहासिक जड़ें हैं, जो 13वीं से 15वीं शताब्दी के यहां के मजापहित साम्राज्य से जुड़ी हैं. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से लाल और सफेद रंग इंडोनेशियाई द्वीप की पहचान रही है. यहां तक की मोनाको के बनने से पहले से इसका कनेक्शन रहा है.

मोनाको का झंडा आकार में थोड़ा वर्गाकार होता है. फोटो: Pexels

तमाम विवाद और मोनाको के तर्क के बावजूद इंडोनेशिया की तत्कालीन सरकार ने अपना राष्ट्रीय ध्वज बदलने से मना कर दिया. इसका कारण बताते हुआ कहा कि लाल और सफेद रंग लंबे समय से इंडोनेशियाई जनता के संघर्ष का प्रतीक रहे हैं, जिसका मोनाको से कोई संबंध नहीं है. राष्ट्रीय झंडे का चुनाव और रंग, किसी दूसरे देश के झंडे से नहीं, बल्कि देश के इतिहास से जुड़ा है.

क्या हल निकला?

विवाद के बीच दोनों देशों ने हल निकाला ताकि भविष्य में अंतराष्ट्रीय स्तर पर इसको लेकर कंफ्यूजन से बचा जा सके. दोनों देशों ने अपनेअपने झंडे के अलगअलग आकार के अनुपातों पर तैयार करने का फैसला लिया.

इंडाेनेशिया ने झंडे का अनुपात 2:3 रखा. वहीं, मोनाको ने 4:5 का अनुपात अपनाया. यानी झंडा छोटा और चौकोर दिखता है. हालांकि यह अंतर इतने सूक्ष्म हैं कि एक नजर में इसका लगाना मुश्किल है. लाल और सफेद रंग को ध्यान से देखने पर ही यह समझा जा सकता है.

इंडोनेशिया का झंडा अधिक आयताकार है. फोटो: Pexels

लाल रंग की टोन में बदलाव किया

आकार के अलावा जो बदलाव हुआ वो था लाल रंग. इंडोनेशिया और मोनाको दोनों लाल और सफेद रंग का उपयोग करते हैं, लेकिन उनके द्वारा चुने गए लाल रंग के विशिष्ट शेड थोड़े भिन्न होते हैं. इंडोनेशिया के ध्वज में पैंटोन रेड 032 का उपयोग किया गया है. दूसरी ओर, मोनाको रेड 032 सी का उपयोग करता है , जो रंग में अधिक गहरा दिखाई देता है. आमतौर पर भले ही दोनों रंग में अंतर कर पाना कठिन होता है लेकिन ग्राफिक डिजाइन और प्रिंटिंग की दुनिया में यह काफी महत्वपूर्ण है.

Merupakan suatu kehormatan dapat berpidato di hadapan Parlemen Indonesia. India dan Indonesia terhubung oleh sejarah, budaya, dan hubungan antarmasyarakat yang telah terjalin selama berabadabad. Bersamasama, kita akan terus bekerja sama demi mewujudkan masa depan yang pic.twitter.com/TVNWUIm1Ng

— Narendra Modi July 7, 2026

रंगों के मायने

दोनों देशों के झंडे भले ही एक जैसे दिखते हैं लेकिन रंगों के मायने अलगअलग हैं.इंडनेशिया में लाल रंग जन संघर्ष और वीरता का प्रतीक है. सफेद रंग ईमानदारी और पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है. इस तरह यहां का झंडा स्वतंत्रता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है. वहीं, मोनाको के मामले में सफेद और सफेद रंग क्रांति और संघर्ष नहीं ग्रिमाल्डी राजवंश के प्रतीक चिन्हों को दिखाता है. यह कुलीन विरासत का प्रतीक अधिक है.