Apsara Tilottama: प्राचीन भारत की कथाओं में कई ऐसी कहानियां मिल जाएगी जिसमें अहंकार और अधर्म के अंत को दिखाया गया है जो एक अनोखे तरीके से सीख देते हुए होता है। इसी कड़ी में एक ऐसी रहस्यमयी कथा है तिलोत्तमा की, जिसे संसार की सबसे सुंदर स्त्री कहा जाता था। बताया जाता था कि उसकी सुंदरता इतनी अद्भुत थी कि देवता भी उसको देखकर मोहित हो जाते थे। कथा में बताया गया है कि सुंद और उपसुंद नाम के दो असुर भाई थे। दोनों में इतना प्यार था कि वे कभी एक-दूसरे से अलग नहीं रहते थे। जिसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया कि जिससे समय में काफी बदलाव हुए कथा में बताया जाता है कि उनका वरदान था कि कोई देवता, दानव या मानव उन्हें ना मार पाए।

वरदान मिलते ही बढ़ गया अत्याचार
मिलने के बाद दोनों असुरों का अहंकार इतना बढ़ गया कि उन्होंने तीनों लोकों में आतंक फैलाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने स्वर्गलोक पर भी आक्रमण कर दिया था। जिसके बाद सभी देवता भयभीत हो गए और ब्रह्माजी के पास रक्षा की प्रार्थना लेकर पहुंच गए। जिसके बाद ब्रह्माजी ने एक ऐसी योजना तैयार कि जिसकी कल्पना भी कभी किसी ने नहीं की थी।
बताया जाता है कि उन्होंने विश्वकर्मा को आदेश दिया कि संसार की सबसे सुंदर स्त्री की रचना की जाए। जिसको सुनने के बाद विश्वकर्मा ने पूरी सृष्टि के श्रेष्ठ गुणों और सौंदर्य के अंशों को मिलाकर एक दिव्य अप्सरा को बनाकर तैयार कर दिया जिसका नाम तिलोत्तमा रखा गया।
तिलोत्तमा की सुंदरता देखकर देवता भी रह गए स्तब्ध
कथा में बताया जाता है कि तिलोत्तमा इतनी मोहक थी कि जब वह शिव के सामने से गुज़री तो उन्हें उसे देखने के लिए चारों दिशाओं में मुख प्रकट करने पड़े थे। इस प्रसंग से पता चलता है कि उनकी अलौकिक सुंदरता कितनी खास थी। तिलोत्तमा के तैयार होनेके बाद ब्रह्माजी ने उन्हें सुंद और उपसुंद के पास भेजा दिया। जिसके बाद दोनों असुरों ने उसे देखा और उससे प्रेम करने लगे। दोनों ही असुर उसे अपनी पत्नी बनाना चाहते थे और हुआ ये की धीरे-धीरे यही प्रेम विवाद में बदलता चला गया।
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जब भाई ही बन गए एक-दूसरे के दुश्मन
प्रेम में आने के बाद जो भाई कभी एक-दूसरे से अलग नहीं होते थे वही तिलोत्तमा को पाने के लिए एक-दूसरे के शत्रु बन चुके थे। जिसमें क्रोध और अहंकार दोनों के बीच भयंकर युद्ध का कारण बना और अंततः उन्होंने एक-दूसरे का वध कर दिया। जिस कारण से तिलोत्तमा की रचना केवल सौंदर्य के लिए नहीं बल्कि अधर्म और अहंकार के विनाश के लिए भी हुई थी। वहीं यह कथा आज भी इस बात का संदेश है कि शक्ति और वरदान भी तब विनाश का कारण बन जाते हैं जब उनमें अहंकार को जोड़ दिया जाता है।





