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वैज्ञानिकों की डरावनी रिपोर्ट: भारत में आने वाली है ‘Silent Killer Summer’

मई खत्म होने को है और तपती दोपहर में लोग घरों में छिपे रहने को मजबूर हैं. ये तपन अब सिर्फ मौसम की मार नहीं लगती, बल्कि लोगों के भीतर डर पैदा करने लगी है. सुबह होते ही धूप का तेवर ऐसा हो जाता है कि कई शहरों में सुबह 9 बजे के बाद बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं रहता. सड़कों पर चलने पर ऐसा महसूस हो रहा है कि मानों ये डामर की न बनी हों बल्कि पिघले हुए लोहे पर ढाली गई हों, वहीं हवाओं में ठंडक की जगह आग की लपटें महसूस होती हैं. इसी बीच वैज्ञानिकों की एक नई चेतावनी ने हमारी चिंता और बढ़ा दी है. उनका कहना है कि भारत में बढ़ती गर्मी अब धीरे-धीरे एक ऐसे ‘साइलेंट किलर’ में बदल रही है, जो बिना किसी शोर के लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रही है.

वैज्ञानिकों की डरावनी रिपोर्ट: भारत में आने वाली है ‘Silent Killer Summer’
वैज्ञानिकों की डरावनी रिपोर्ट: भारत में आने वाली है ‘Silent Killer Summer’

रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में देश के कई हिस्सों में हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ सकता है। यानी सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि उमस और गर्म हवाओं का मिला-जुला असर इंसानी शरीर पर भारी पड़ेगा. एक्सपर्ट्स के मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, छोटे बच्चों, दिहाड़ी मजदूरों और खुले में काम करने वाले लोगों को होगा, क्योंकि लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने से शरीर की सहन क्षमता तेजी से टूटने लगती है.

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देश के कई राज्यों में दिखा ‘साइलेंट किलर’ का असर
इस साल हालात पहले से ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहे हैं. अप्रैल खत्म होने से पहले ही कई राज्यों में लू चलने लगी थी. राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पारा 45 डिग्री को पार कर गया. मौसम विभाग को कई जगह रेड अलर्ट जारी करना पड़ा. लोगों ने दिन में बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा तक महसूस किया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है. बड़ी समस्या यह भी है कि अब रात में भी तापमान कम नहीं हो रहा. पहले देर रात तक लोगों को थोड़ी राहत मिल जाती थी, लेकिन अब गर्म हवाएं रातभर बनी रहती हैं. इसका असर सीधे शरीर पर पड़ रहा है और अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर और हार्ट से जुड़ी समस्याओं के मामले बढ़ते दिख रहे हैं.

‘साइलेंट किलर’ पर वैज्ञानिकों की रिपोर्ट से दहशत में लोग
एक हालिया वैज्ञानिक रिपोर्ट में इस बात की चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में भारत के कई बड़े शहर इस ‘साइलेंट किलर’ से होने वाली मौतों के बड़े खतरे का सामना कर सकते हैं. वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि अगर अभी से तैयारी नहीं की गई तो अगले कुछ सालों में गर्मी देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संकटों में शामिल हो सकती है. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि लोग अभी भी इस भीषण गर्मी को सामान्य मौसम समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खतरा धीरे-धीरे करोड़ों लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है, और अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं.

अगर नहीं रुका ‘साइलेंट किलर’ तो…
तेजी से बढ़ती गर्मी अब खेतों पर भी असर दिखाने लगी है. तापमान जब सामान्य सीमा से ऊपर चला जाता है, तो यह ‘साइलेंट किलर’ का रूप ले लेता है. आपको पता भी नहीं चलता है कि ये ‘साइलेंट किलर’ कितनी तेजी से आपकी फसलों पर असर डालने लगता है. तापमान बढ़ने के साथ ही फसलों की ग्रोथ पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है और इनकी बढ़ने की स्पीड कम हो जाती है. इस दौरान कई पौधे मुरझाने लगते हैं. वहीं पौधों में लगे अनाज के दाने सूखने लगते हैं. इससे आपकी फसलों की पैदावार काफी प्रभावित हो जाती है और इसक असर आपके उत्पादन पर दिखाई देने लगता है. समय रहते अगर इसे नहीं रोका गया तो आने वाले समय में हमें इसके गंभीर परिणाम दिखाई देंगे.

कृषि पर ‘साइलेंट किलर’ के हमले का असर
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि ज्यादा गर्मी के दौरान पौधों पर दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में फसल अपनी सामान्य जैविक प्रक्रिया ठीक तरह से नहीं कर पाती. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी जा रही है. खेतों में पर्याप्त सिंचाई बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे. इसके अलावा खेतों की जुताई करने से जमीन जल्दी सूखती नहीं है और मिट्टी की नमी बनी रहती है, जिससे पौधों को गर्मी से कुछ राहत मिलती है. ऐसी गर्मी से फसलों के पौधों की पत्तियों का पीला पड़ना, झुकना या सूखना हीट स्ट्रेस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. समय पर पहचान होने पर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में हम लोग तो गर्मी से बचने का उपाय ढूंढ लेते हैं लेकिन फसलों पर इसका असर दिखाई देता है.

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