वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने वीकेंड गोल्फ कार्यक्रम रद्द कर अचानक व्हाइट हाउस लौट आए हैं। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की तैयारी कर सकता है। CBS न्यूज ने दावा किया है कि ट्रम्प प्रशासन संभावित नए हमलों की प्लानिंग पर विचार कर रहा है, हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन और सेना के कई सीनियर अधिकारियों ने भी अपने छुट्टी और हॉलिडे प्रोग्राम रद्द कर दिए हैं। इसी बीच ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने दावा किया कि ईरानी सेना दुश्मन की किसी भी बेवकूफी का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रम्प का काफिला व्हाइट हाउस की तरफ जाता हुआ
ईरान पर हमला ना करने की अपील- सऊदी अरब, UAE और कतर ने ट्रम्प से ईरान पर हमला न करने और युद्ध की जगह कूटनीति अपनाने की अपील की है।
EU नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में- यूरोपीय यूनियन (EU) होर्मुज स्ट्रेट बंद कराने के आरोप में ईरानी अधिकारियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है।
होर्मुज खोलने के लिए फ्रांस का प्रस्ताव- फ्रांस ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मिशन तैनात करने का नया प्रस्ताव तैयार किया है।
पाकिस्तान सेना प्रमुख ईरान में- पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे, जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने और समझौते पर चर्चा हुई।
कतर की टीम तेहरान पहुंची- रॉयटर्स के मुताबिक, युद्ध खत्म कराने और बाकी विवाद सुलझाने के लिए कतर की एक टीम शुक्रवार को तेहरान पहुंची है।
Khabar Monkey
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ईरान बोला- पिछले 24 घंटे में 25 जहाज होर्मुज से गुजरे
ईरान की नौसेना ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में होर्मुज स्ट्रेट से 25 जहाज गुजरे हैं।
पिछले कुछ दिनों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या लगातार बदलती रही है। युद्ध और तनाव की वजह से ट्रैफिक सामान्य स्तर से काफी नीचे है।
IRGC ने शुक्रवार को दावा किया था कि उनके 26 जहाज होर्मुज से गुजरे हैं। यानी अभी लगातार दो दिनों से ट्रैफिक लगभग 25-26 जहाज प्रतिदिन के आसपास बना हुआ है, जबकि सामान्य समय में यह संख्या 100 से ज्यादा रहती थी।
ईरान से अकेले डील में जुटा अमेरिका, इजराइल किनारे
ट्रम्प सरकार ने ईरान के साथ चल रही युद्धविराम और परमाणु बातचीत से इजराइल को लगभग बाहर कर दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली अधिकारियों को अमेरिका-ईरान बातचीत की जानकारी सीधे वॉशिंगटन से नहीं मिल रही। उन्हें क्षेत्रीय नेताओं, राजनयिक संपर्कों और ईरान के भीतर अपनी खुफिया निगरानी के जरिए जानकारी जुटानी पड़ रही है।
यह बदलाव प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। उन्होंने लंबे समय तक खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश किया जो ट्रम्प पर सबसे ज्यादा असर रखते हैं। युद्ध की शुरुआत में नेतन्याहू ने कहा था कि वे ट्रम्प से लगभग हर दिन बात करते हैं और दोनों मिलकर फैसले लेते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प सरकार अब ईरान के साथ ऐसे समझौते पर विचार कर रहा है जिसमें ईरान की परमाणु गतिविधियों पर केवल सीमित समय के लिए रोक लगे। यह प्रस्ताव काफी हद तक 2015 के उस परमाणु समझौते जैसा माना जा रहा है जिसका नेतन्याहू ने उस समय कड़ा विरोध किया था।
इजराइल की एक और बड़ी चिंता यह है कि बातचीत में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुद्दा शायद शामिल ही नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो इजराइल के लिए यह बड़ा झटका होगा क्योंकि मार्च और अप्रैल में ईरानी मिसाइल हमलों से वहां सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
इसके अलावा इजराइल को डर है कि अगर अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाता है तो तेहरान को अरबों डॉलर मिल सकते हैं। इससे ईरान फिर से अपने हथियार कार्यक्रम और अपने सहयोगी संगठनों जैसे हेजबुल्लाह को मजबूत कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के शुरुआती दिनों में अमेरिका और इजराइल बेहद करीबी तालमेल में काम कर रहे थे। दोनों देशों की सेनाएं साझा रणनीति बना रही थीं। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचा और ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर तेल कीमतों को बढ़ा दिया, ट्रम्प का ध्यान युद्ध खत्म कराने पर ज्यादा केंद्रित हो गया। धीरे-धीरे अमेरिका और इजराइल की प्राथमिकताएं अलग होने लगीं।
एक्सपर्ट बोले- ईरान परमाणु कार्यक्रम पर समझौते को तैयार
तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फोआद इजादी ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले उसकी कुछ अहम शर्तें हैं।
अल जजीरा से बातचीत में इजादी ने कहा कि ईरान पहले भी ऐसा कर चुका है। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते का उदाहरण दिया। इजादी के मुताबिक, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने यूरेनियम एनरिचमेंट की सीमा 3.67% तक रखने पर सहमति दी थी।
उन्होंने कहा कि इस स्तर पर परमाणु हथियार बनाना संभव नहीं माना जाता। साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की व्यापक निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था भी लागू की गई थी।
ईरान बोला- ट्रम्प को और हार का सामना करना पड़ेगा
ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलई-निक ने कहा है कि अगर अमेरिका ईरान के अधिकारों को नहीं मानता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को और हार का सामना करना पड़ेगा।
ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के लिए इस युद्ध से निकलने का एकमात्र रास्ता ईरानी जनता की मांगों को मानना है।
रेजा तलई-निक ने कहा कि अमेरिका को ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए। अगर युद्ध जारी रहता है, तो इसका नुकसान सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को उठाना पड़ेगा।
परणामु वार्ता फैल होने पर UN महासचिव ने निराशा जताई
संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने परमाणु हथियारों को रोकने से जुड़ी बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक बिना किसी समझौते के खत्म होने पर निराशा जताई है।
यह बैठक न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) की 11वीं समीक्षा सम्मेलन थी, जिसमें सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
गुटेरेस ने अपने प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के जरिए जारी बयान में कहा कि यह दुनिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने का एक अहम मौका था, जो अब हाथ से निकल गया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं, इसलिए इस बैठक का सफल होना बेहद जरूरी था।
एक्सपर्ट बोले- मौजूदा संघर्ष नेतन्याहू का युद्ध है
तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फोआद इजादी ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन पहले उसे यह भरोसा चाहिए कि ट्रम्प स्वतंत्र विदेश नीति चला सकते हैं।
अल जजीरा से बातचीत में इजादी ने कहा कि तेहरान में आम राय यह है कि मौजूदा संघर्ष बेंजामिन नेतन्याहू का युद्ध है और उन्होंने अमेरिका को भी इसमें शामिल कर लिया।
उन्होंने कहा कि कई पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने भी माना है कि नेतन्याहू पहले के अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर भी ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने का दबाव डाल चुके हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।
गाजा के बच्चे गंभीर त्वचा रोग से जूझ रहे
गाजा में जारी युद्ध और फूड संकट का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में बड़ी संख्या में बच्चे गंभीर त्वचा रोग और संक्रमण से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि साफ पानी, दवाइयों और खाने की कमी की वजह से बच्चों की हालत लगातार खराब हो रही है।
जंग की आहट के बीच पिछले 72 घंटे के बड़े अपडेट
पिछले तीन दिनों में अमेरिका, ईरान और मिडिल ईस्ट से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने संभावित बड़े सैन्य तनाव की अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि अभी तक किसी नए अमेरिकी हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कई घटनाओं को गंभीर संकेत माना जा रहा है।
ट्रम्प अचानक व्हाइट हाउस लौटे- डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने बेटे की शादी से जुड़ा कार्यक्रम और वीकेंड प्लान रद्द कर दिया। व्हाइट हाउस लौटते समय उन्होंने कहा कि यह फैसला सरकारी परिस्थितियों की वजह से लिया गया है। बाद में उन्होंने इसे ईरान से जुड़ा मामला बताया।
अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर- CBS की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के कई सीनियर अधिकारियों ने पूरा मेमोरियल डे वीकेंड कैंसल कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकारियों को संभावित नए अमेरिकी हमलों की स्थिति में तैयार रहने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है।
मिडिल ईस्ट से सैनिकों की तैनाती बदली जा रही- रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका विदेशों में अपने इमरजेंसी रिकॉल सिस्टम को अपडेट कर रहा है। साथ ही कुछ सैनिकों को मिडिल ईस्ट से बाहर भी भेजा जा रहा है ताकि संभावित ईरानी जवाबी हमलों में अमेरिकी ठिकाने कम निशाना बनें।
तेहरान पहुंचे पाकिस्तान सेना प्रमुख- पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर चुपचाप तेहरान पहुंचे हैं। उन्हें ईरान के गृह मंत्री ने रिसीव किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर और पाकिस्तान दोनों अमेरिका और ईरान के बीच आखिरी समय में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।
तुलसी गबार्ड ने दिया इस्तीफा- अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 30 जून से प्रभावी होगा। DNI का पद अमेरिका की सभी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट को राष्ट्रपति तक पहुंचाने वाले सबसे अहम पदों में माना जाता है।
ईरान ने भी बढ़ाई सतर्कता- ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध सोमवार तक बढ़ा दिए हैं। वहीं ईरानी सेना ने सार्वजनिक बयान में कहा है कि वह दुश्मन की किसी भी मूर्खता का जवाब देने के लिए तैयार है।
नाटो बैठक में ईरान को लेकर अमेरिका-यूरोप के बीच मतभेद
स्वीडन में NATO देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार को खत्म हो गई। इस बैठक में जुलाई में होने वाले अंकारा शिखर सम्मेलन से पहले सुरक्षा और रक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में NATO देशों की सैन्य ताकत बढ़ाने, रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत करने और सदस्य देशों द्वारा रक्षा बजट को जीडीपी के 5 प्रतिशत तक ले जाने जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई।
इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव भी बैठक का बड़ा मुद्दा रहा। NATO महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट बंद करके ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि देश मिलकर ऐसे कदम उठाएं जिससे होर्मुज स्ट्रेट जहाजों की आवाजाही के लिए खुला रहे।
बैठक के दौरान ईरान को लेकर अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों के बीच मतभेद भी सामने आए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि सभी NATO देश इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने चाहिए।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जब ट्रम्प प्रशासन ने कार्रवाई की मांग की, तब बहुत कम देशों ने खुलकर समर्थन किया।
इजराइली सेना के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में कई जगह छापेमारी
इजराइली सेना ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के कई इलाकों में छापेमारी और गिरफ्तारियां की हैं। वहीं कुछ जगहों पर इजराइली बसने वालों पर फिलिस्तीनी समुदाय को परेशान करने के आरोप भी लगे हैं।
फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वफा के मुताबिक, अलग-अलग शहरों और गांवों में कई घटनाएं सामने आई हैं। वहीं उत्तरी वेस्ट बैंक के टुबास शहर में 21 साल के यूसुफ सुब्ह को इजराइली सेना ने गिरफ्तार कर लिया।
फिलिस्तीनी प्रिजनर्स सोसाइटी के मुताबिक, उसे सैन्य ठिकाने पर पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
ईरान-ओमान के विदेश मंत्रियों ने जंग रोकने पर बातचीत की
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने की कोशिशों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी से फोन पर बातचीत की।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हालात और युद्ध रोकने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों पर चर्चा की।
ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम के अनुसार, बातचीत में क्षेत्रीय हालात, तनाव कम करने और युद्ध खत्म करने की कोशिशों प्रयासों को लेकर दोनों पक्षों ने बात की।
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशें तेज हुई हैं। इसी वजह से कई देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है। ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।
जापानी ऑयल टैंकर ने होर्मुज पार किया, इस पर 20 लाख बैरल तेल
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच जापान का एक तेल टैंकर सुरक्षित तरीके से यह रास्ता पार कर गया है। जापानी मीडिया के मुताबिक, इदेमित्सु मारू नाम का यह टैंकर सोमवार को जापान के आइची इलाके में पहुंच सकता है।
यह जहाज सऊदी अरब से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज पर मौजूद तीनों जापानी कर्मचारी सुरक्षित हैं।
ईरान बोला- ट्रम्प के पास कोई और रास्ता नहीं
ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाए-निक ने ट्रम्प को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास ईरानी जनता की मांगें मानने और ईरान के अधिकारों को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
उन्होंने कहा कि चाहे युद्ध हो या बातचीत, दोनों हालात में अमेरिका और इजराइल के लिए यही एक रास्ता है। उनके मुताबिक अगर वे ईरान की मांगों को नहीं मानते, तो दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
ईरानी प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को नजरअंदाज कर रहे हैं और पूरी तरह इजराइल के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प का अहंकारी रवैया अमेरिका को युद्ध के दलदल में और गहराई तक ले जाएगा।





