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‘बिहार तो हरियाणा वालों का इंटरनेशनल ससुराल…’, 4 साल तक सुपरवाइजर करता रहा टॉर्चर, गुरुग्राम में बेगूसराय के युवक का 8 पेज का सुसाइड नोट

Gurugram News: दिल्ली से सटे गुरुग्राम (हरियाणा) में एक रूह कंपा देने वाला और पूरे सिस्टम को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां बिहार के बेगूसराय के रहने वाले 32 वर्षीय युवक रामपुकार यादव ने अपने कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली. लेकिन मरने से पहले रामपुकार ने जो 8 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा है, उसने कॉर्पोरेट जगत से लेकर पुलिस प्रशासन तक को हिलाकर रख दिया है. रामपुकार ने आत्महत्या करने से ठीक 15 मिनट पहले यह सुसाइड नोट अपने बड़े भाई और भांजे को वॉट्सऐप पर भेजा था.

‘बिहार तो हरियाणा वालों का इंटरनेशनल ससुराल…’, 4 साल तक सुपरवाइजर करता रहा टॉर्चर, गुरुग्राम में बेगूसराय के युवक का 8 पेज का सुसाइड नोट
‘बिहार तो हरियाणा वालों का इंटरनेशनल ससुराल…’, 4 साल तक सुपरवाइजर करता रहा टॉर्चर, गुरुग्राम में बेगूसराय के युवक का 8 पेज का सुसाइड नोट

सुसाइड नोट में कंपनी के सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार पर नशीला पदार्थ पिलाकर कुकर्म (शारीरिक संबंध बनाने), लगातार ब्लैकमेल करने, पैसों की उगाही करने और अंत में युवक की पत्नी को भेजने की घिनौनी डिमांड करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मूल रूप से बेगूसराय जिले के गढ़पुरा थाना क्षेत्र स्थित रक्सी गांव के रहने वाले रामपुकार यादव जनवरी 2022 से गुरुग्राम के सेक्टर-20, उद्योग विहार फेज-II में स्थित एक नामी कंपनी में कार्यरत थे. उनकी पत्नी रूबी देवी और उनका इकलौता बेटा गांव में ही रहते हैं.

रामपुकार ने अपने सुसाइड नोट में अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि कंपनी का सुपरवाइजर देवेंद्र कुमार उन्हें पिछले 3 साल से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था. शुरुआत में दोनों एक ही कमरे में रहते थे. रामपुकार शराब नहीं पीते थे, लेकिन एक दिन देवेंद्र ने धोखे से उनकी कोल्ड ड्रिंक में शराब मिला दी. जब रामपुकार पूरी तरह बेसुध हो गए, तो देवेंद्र ने उनके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए. अगले दिन जब रामपुकार ने इसका कड़ा विरोध किया, तो देवेंद्र ने उन्हें समाज में बदनाम करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. यह सिलसिला फरवरी 2022 से जुलाई 2023 तक लगातार चलता रहा.

पुलिस का रौब दिखाकर ऐंठे पैसे

सुसाइड नोट के मुताबिक, जुलाई 2023 में देवेंद्र अपने भाई के साथ रहने के लिए पालम (दिल्ली) चला गया, लेकिन उसकी प्रताड़ना कम नहीं हुई. वह रामपुकार से लगातार पैसों की मांग करने लगा. जब रामपुकार ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो देवेंद्र ने धमकी दी कि उसके अंकल हरियाणा पुलिस में हैं और वह उन्हें पकड़वाकर बुरी तरह पिटवा देगा.

…फिर की लड़कियों की डिमांड

डर के मारे रामपुकार उसे 10 से 15 हजार रुपये कैश देने लगे. ऑनलाइन लेन-देन का रिकॉर्ड न बने, इसलिए देवेंद्र ज्यादातर कैश ही लेता था. कुछ समय बाद देवेंद्र का किसी लड़की से अफेयर हुआ, लेकिन वह लड़की उसे छोड़कर भाग गई. इसके बाद देवेंद्र ने रामपुकार पर दबाव बनाया कि वह उसके लिए किसी लड़की की व्यवस्था करे. रामपुकार ने लिखा, “मैं गांव में अपना घर बना रहा था, मेरे पास खुद पैसे नहीं थे, मैं लड़की कहां से लाता?”

‘अपनी बीवी को मेरे पास लाओ’

जब रामपुकार लड़की का इंतजाम नहीं कर पाए, तो देवेंद्र ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी. इसके बाद देवेंद्र ने कंपनी के हाउसकीपिंग डिपार्टमेंट में काम करने वाली लड़कियों से बात करने का दबाव बनाया. जब रामपुकार ने इस घिनौने काम से भी साफ मना कर दिया, तो देवेंद्र ने सारी हदें पार करते हुए कहा, “अगर तुम बाहर से लड़की अरेंज नहीं कर सकते, तो गांव से अपनी खुद की पत्नी को मेरे पास बुला लो.”

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क्षेत्रीय अस्मिता पर किया प्रहार

रामपुकार ने सुसाइड नोट में क्षेत्रीय भेदभाव और नस्लीय टिप्पणी का भी दर्द बयां किया है. उन्होंने लिखा कि देवेंद्र उन्हें हमेशा ‘बिहारी’ कहकर जलील करता था. वह कहता था, “हम हरियाणा वालों का बिहार इंटरनेशनल ससुराल है. बिहारन को 80 हजार रुपये में खरीदकर लाते हैं. तुम्हारे यहां की लड़कियां 80 हजार में बिक जाती हैं, जबकि हमारे हरियाणा में तो एक भैंस भी 1 लाख 30 हजार रुपये से बिकनी शुरू होती है.” इस भयंकर अपमान से टूटकर रामपुकार कुछ दिनों के लिए छुट्टी लेकर गांव चले गए थे, लेकिन वापस आने पर प्रताड़ना और बढ़ गई.

कंपनी के मैनेजर, एडमिन और HR ने भी नहीं की कोई मदद

इस पूरी घटना का सबसे काला पक्ष यह है कि रामपुकार ने न्याय के लिए कंपनी के भीतर हर दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने सबसे पहले अपने मैनेजर को पूरी बात बताई और अपना डिपार्टमेंट बदलने की भीख मांगी. मैनेजर ने कहा कि वह देवेंद्र को समझा देंगे, लेकिन कुछ नहीं किया.

जब देवेंद्र ने पत्नी की डिमांड की, तो रामपुकार ने कंपनी के एडमिन पंकज मिश्रा को इसकी जानकारी दी. पंकज मिश्रा ने उन्हें दोबारा मैनेजर के पास भेज दिया. इसके बाद थक-हारकर रामपुकार कंपनी के एचआर (HR) डिपार्टमेंट में भी गए, लेकिन एचआर ने भी कोई कड़ा एक्शन लेने के बजाय मामले को दबाने और आपस में खत्म करने की सलाह दी. हर तरफ से निराश होने के बाद रामपुकार पूरी तरह टूट गए. उन्होंने अपने सुसाइड नोट के अंत में लिखा, “आई एम सॉरी नितिन सर, आप कहते थे कि किसी से भागो मत सामना करो. मैंने साढ़े तीन साल सामना किया, लेकिन जब बात मेरी वाइफ पर आ गई तो मैं अंदर से टूट गया. इसके लिए सिर्फ देवेंद्र ही जिम्मेदार है.”

15 मिनट में लगा ली फांसी, दरवाजा तोड़कर निकाली गई लाश

17 मई की दोपहर करीब 12 बजे रामपुकार ने सुसाइड नोट वॉट्सऐप पर भेजने के बाद कमरे के पंखे से लटककर जान दे दी. जब परिजनों ने मैसेज देखा, तो उन्होंने तुरंत पड़ोसियों को फोन किया. पड़ोसियों ने जब दरवाजा तोड़ा तो अंदर रामपुकार का शव लटक रहा था.

30 घंटे तक नहीं दर्ज हुई FIR, लाचार होकर शव बेगूसराय लाए परिजन

परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में रहने वाले सभी रिश्तेदार मौके पर पहुंचे. कापसहेड़ा थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लिया, लेकिन रविवार का बहाना बनाकर पोस्टमॉर्टम टाल दिया और शव को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, हरीनगर में रखवा दिया. सोमवार को भी पुलिस समय पर नहीं पहुंची.

परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने आरोपी देवेंद्र के खिलाफ सुसाइड नोट के आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की, तो पुलिस टालमटोल करती रही. पुलिस ने कहा कि पहले अंतिम संस्कार कर लो, फिर देखेंगे. सोमवार शाम तक जब 30 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया और शव खराब होने लगा, तो परिजन लाचार होकर बिना FIR के ही शव को बेगूसराय अपने गांव ले आए. बुधवार को शव गांव पहुंचने के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया है. वहीं, कापसहेड़ा थाना के एसएचओ नवीन कुमार का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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