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भारत में कच्चे तेल ने तोड़े सारे रिकॉर्ड…क्या फिर पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?

मंगलवार को देश के वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतें 226 रुपए बढ़कर 10,150 रुपए प्रति बैरल के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं. इसकी वजह सप्लाई में रुकावटों और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी अस्थिरता को लेकर लगातार बनी चिंताएं है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, जून डिलीवरी वाले कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त देखने को मिली.

भारत में कच्चे तेल ने तोड़े सारे रिकॉर्ड…क्या फिर पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?
भारत में कच्चे तेल ने तोड़े सारे रिकॉर्ड…क्या फिर पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?

यह 226 रुपए, या 2.3 प्रतिशत की छलांग लगाकर 10,150 रुपये प्रति बैरल के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. विश्लेषकों ने बताया कि वैश्विक बेंचमार्क में कमजोरी के बावजूद घरेलू कच्चे तेल के वायदा भाव मजबूत बने रहे. इसकी वजह यह थी कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संभावित कूटनीतिक विराम के संकेतों से कुछ भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (geopolitical risk premiums) में नरमी आई थी.

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इंटनेशनल मार्केट में आई नरमी

इंटरनेशनल मार्केट्स में, जुलाई डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड लगभग 2 फीसदी गिरकर 110.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि इसी महीने के अनुबंध वाला वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1 प्रतिशत फिसलकर 103.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. ब्रोकरेज फर्म कोटक नियो (पहले कोटक सिक्योरिटीज) ने कहा कि मंगलवार को WTI कच्चा तेल लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल गया. कई सत्रों की जोरदार तेजी के बाद इसमें नरमी आई, क्योंकि भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम में थोड़ी कमी आई थी.

तेल की कीमतों में नरमी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, कतर और UAE की अपील के बाद ईरान पर प्लांड सैन्य हमले को कैंसल कर दिया है. इससे यह उम्मीद जगी है कि कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू हो सकती है. हालांकि, कारोबारी सतर्क बने रहे, क्योंकि ईरान ने अभी तक अमेरिका के साथ बातचीत में किसी भी सफलता का कोई संकेत नहीं दिया है.

रूसी तेल को राहत

पिछले एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है. इसकी मुख्य वजह परमाणु वार्ता का रुकना और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से टैंकर्स की आवाजाही में आई रुकावटें हैं. होर्मुज स्ट्रेट ग्लोबल एनर्जी ट्रांसपोर्ट रूट की एक प्रमुख धमनी (मुख्य मार्ग) है. कोटक नियो ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जारी नाकेबंदी को लेकर बनी चिंताएं तेल बाजारों में ऊंचे जोखिम प्रीमियम को लगातार समर्थन दे रही हैं.

ब्रोकरेज फर्म ने आगे कहा कि अमेरिका द्वारा दी गई एक अस्थायी छूट, जिसके तहत टैंकरों में पहले से लदे रूसी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति दी गई है, निकट भविष्य में सप्लाई के मोर्चे पर सीमित राहत दे सकती है. फर्म ने यह भी जोड़ा कि कूटनीति में प्रगति का कोई भी संकेत मुनाफावसूली (profit-booking) को बढ़ावा दे सकता है. हालांकि, होर्मुज में जारी रुकावटें और लगातार बने जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर रहने और उन्हें लगातार समर्थन मिलने की संभावना है.

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