तमिल अभिनेता जय एक समय तमिल सिनेमा के उभरते सितारों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फिल्म भगवती से की थी, जिसमें उन्होंने अभिनेता सी जोसेफ विजय के छोटे भाई का किरदार निभाया था।

इसके बाद उन्होंने चेन्नई 600028, सुब्रमणिपुरम, गोवा, एंगेयुम एप्पोथुम और राजा रानी जयसी फिल्मों में दमदार अभिनय कर अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि, बाद के वर्षों में उनकी कई फिल्में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं और धीरे-धीरे उनका करियर पीछे छूटता चला गया।
इसी दौरान उनके इस्लाम धर्म अपनाने की चर्चा भी सामने आई। शुरुआत में उन्होंने इन खबरों को अफवाह बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि वे इस्लाम को मानने लगे हैं। साल 2019 में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वे पिछले सात वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि उन्हें इस धर्म में एक अलग तरह की आस्था और शांति महसूस हुई। यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपना नाम बदलकर “अज़ीज़ जय” रखने पर विचार कर रहे हैं।
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जय ने अपने धर्म परिवर्तन के पीछे की वजहों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया। कभी सबरीमला यात्रा के लिए माला पहनी, तो कभी ईसाई धर्म के अनुसार प्रार्थना की। उनका कहना था कि वे हर धर्म को समान भाव से अपनाने की कोशिश कर रहे थे।
लेकिन अभिनेता के अनुसार, कुछ मंदिरों में उन्हें ऐसे अनुभव हुए जिनसे वे आहत हुए। उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा और उन्हें वह सम्मान महसूस नहीं हुआ जिसकी वे उम्मीद कर रहे थे। जय ने बताया कि इन घटनाओं ने उन्हें भीतर से परेशान किया और धीरे-धीरे उनका मन बदलने लगा।
उन्होंने आगे कहा कि जब वे पहली बार मस्जिद गए, तो वहां का माहौल उन्हें बेहद अलग लगा। उनके मुताबिक, वहां मौजूद लोगों को पता था कि वे एक अभिनेता हैं, फिर भी किसी ने उनके साथ अलग व्यवहार नहीं किया। मस्जिद के अंदर किसी ने उनसे फोटो नहीं मांगी और न ही किसी प्रकार की विशेष तवज्जो दी। बाहर आने के बाद लोगों ने उनसे बहुत सम्मान और शालीनता से बातचीत की।
जय ने कहा कि मस्जिद में उन्हें बराबरी की भावना महसूस हुई। उन्हें लगा कि वहां हर व्यक्ति को समान नजर से देखा जाता है और केवल ईश्वर को सर्वोच्च माना जाता है। उन्होंने कहा कि वहां किसी को पूजा या प्रार्थना के दौरान रोका नहीं जाता, न ही जल्दी करने के लिए कहा जाता है। वे जितनी देर चाहें, उतनी देर शांति से प्रार्थना कर सकते थे। अभिनेता के अनुसार, यह अनुभव उन्हें योग और मानसिक शांति जयसा लगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस्लाम अपनाने के बाद उनके स्वभाव और व्यक्तित्व में भी बदलाव आया। उनका मानना है कि वे पहले की तुलना में अधिक शांत और संतुलित हो गए हैं। जय ने साफ किया कि उनका धर्म परिवर्तन उनके करियर में आई गिरावट से जुड़ा नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह उनके व्यक्तिगत अनुभवों और आध्यात्मिक सोच का परिणाम था।
वर्कफ्रंट की बात करें तो जय हाल ही में फिल्म सट्टेंद्रु मारुधु वानिलै में नजर आए थे। इस फिल्म में योगी बाबू, मीनाक्षी गोविंदराजन और गरुड़ा राम ने भी अहम भूमिकाएं निभाई थीं।
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल जानकारी और मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें अभिनेता द्वारा साझा किए गए व्यक्तिगत विचारों और अनुभवों का वर्णन है। किसी भी धर्म, समुदाय या आस्था के प्रति अपमान या पक्षपात का उद्देश्य नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि वे धार्मिक और व्यक्तिगत विषयों को संवेदनशीलता और सम्मान के साथ देखें।





