Tuesday, February 24, 2026
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यूपी में सीबीआई का बड़ा एक्शन, वाप्कोस के प्रोजेक्ट मैनेजर समेत 5 को रंगे हाथ दबोचा

यूपी में सीबीआई का बड़ा एक्शन, वाप्कोस के प्रोजेक्ट मैनेजर समेत 5 को रंगे हाथ दबोचा

Lucknow CBI raid: उत्तर प्रदेश में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सीबीआई ने लखनऊ, गाजीपुर, देवरिया समेत कई जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. इतना ही नहीं सीबीआई ने वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर को उड़ीसा में इमली प्रसंस्करण इकाई का ठेका दिलाने के एवज में दस लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है.

यूपी में सीबीआई का ताबड़तोड़ छापा
प्रोजेक्ट मैनेजर के अलावा सीबीआई ने ठेकेदार समेत पांच आरोपी गिरफ्तार किए गए है. सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो लखनऊ की टीम ने ये बड़ी कार्रवाई की है. आरोपियों के लखनऊ, देवरिया, गाजीपुर और भुवनेश्वर स्थित नौ ठिकानों पर छापे भी मारे गए. रिश्वतखोरी के खेल में शामिल पांच और आरोपियों की तलाश हो रही है.

करोड़ों की रिश्वत वसूली का था प्लान
सीबीआई के अनुसार, मूलरूप से देवरिया निवासी (वर्तमान में लखनऊ में निवास) पंकज दुबे वापकोस में प्रोजेक्ट मैनेजर है. उड़ीसा में इमली प्रसंस्करण इकाई का 11.81 करोड़ रुपये का ठेका 13 जनवरी 2026 को इकाना इंटरप्राइज के प्रोपराइटर बबलू सिंह यादव को दिलाया. इसम एवज में कई किश्तों में करोड़ों की रिश्वत वसूली जानी थी.

कैसे हुई सीबीआई की ये बड़ी कार्रवाई?
सीबीआई के मुताबिक, पंकज की तरफ से शनिवार को बिचौलिए राहुल वर्मा और बबलू की ओर से बिचौलिए राजेश कुमार के जरिये दस लाख रुपये की रिश्वत की किश्त का लेनदेन हुआ. जिसमें पंकज का ड्राइवर शुभम पाल भी शामिल था. इनपुट के आधार पर सीबीआई की टीम ने छापा मार दिया और इन पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. मौके से दस लाख रुपये भी बरामद किए.

सीबीआई ने कहां-कहां मारा छापा?
फिर आरोपियों के ठिकानों पर सीबीआई ने छापा मारा. लखनऊ में सुशांत गोल्फ सिटी और आशियाना में चार जगह छापेमार कार्रवाई हुई. वहीं, देवरिया में एक, गाजीपुर में दो और भुवनेश्वर में दो ठिकानों पर छापेमारी की गई. इस दौरान सीबीआई ने पुख्ता सुबूत जुटाए.

जांच में हुआ ये बड़ा खुलासा
जांच में खुलासा हुआ है कि प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज दुबे कई अधिकारियों, बिचौलियों और उत्तर प्रदेश के कुछ ठेकेदारों के साथ मिलकर ठेके दिलाने से लेकर बिल पास कराने तक 13 फीसदी तक की रिश्वत वसूली का संगठित सिस्टम चला रहे थे. सीबीआई की मानें तो टेंडर दिलाने के लिए 4 से 6 फीसदी, लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) जारी करने के लिए 4 फीसदी और बिल पास कराने के लिए 3 फीसदी कमीशन तय था. अभिषेक ठाकुर और बिचौलिया गोपाल मिश्रा ठेकेदारों से वसूली का काम करते थे. वहीं भुगतान की ‘सेटिंग’ भाभद्युत भूटिया करते थे.

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