हफ्ते के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार ने निवेशकों को गहरा सदमा दिया है. सोमवार की सुबह जैसे ही दलाल स्ट्रीट में कारोबार की शुरुआत हुई, निवेशकों के पोर्टफोलियो पल भर में लाल निशान में रंग गए. ग्लोबल मार्केट में मचे हाहाकार का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है. आलम यह रहा कि बाजार खुलते ही महज चंद सेकंड के भीतर निवेशकों की करीब चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की वेल्थ साफ हो गई. आम निवेशक जो इस हफ्ते एक अच्छे मुनाफे की उम्मीद लगाए बैठे थे, उन्हें चौतरफा बिकवाली के इस माहौल में तगड़ा झटका लगा है. बाजार का यह भारी भरकम पतन रिटेल निवेशकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है.
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महज कुछ पलों में साफ हुई गाढ़ी कमाई
बिकवाली की यह आंधी कितनी तेज थी, इसका सीधा अंदाजा मार्केट कैप के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. बीते कारोबारी दिन यानी 15 मई 2026 को जब बाजार बंद हुआ था, तब बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,60,02,414.097 करोड़ रुपये था. लेकिन, 18 मई की सुबह खुलते ही यह आंकड़ा सीधे 4,55,55,510.86 करोड़ रुपये पर आ गिरा. अगर सीधे शब्दों में समझें, तो निवेशकों की पूंजी में 4,46,903.237 करोड़ रुपये की सेंध लग गई है. यह कोई मामूली गिरावट नहीं है; यह आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई है जो बाजार के भारी दबाव में धुल गई.
इस ग्लोबल टेंशन से सहम गया बाजार
इस भारी भरकम बिकवाली के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मची उथल-पुथल है. अमेरिका तथा ईरान के बीच अचानक बढ़े तनाव ने दुनियाभर के बाजारों में पैनिक का माहौल बना दिया है. इस भू-राजनीतिक संकट के चलते कच्चे तेल के बाजार में आग लग गई है. ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड एक बार फिर से 110 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गया है. चूँकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा मानी जाती हैं. यही डर आज निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली में साफ नजर आया.
लाल निशान में रंगे दिग्गज इंडेक्स
बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह से निराशाजनक बना हुआ है. सुबह 09:20 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 803.53 अंक यानी 1.07 प्रतिशत का गोता लगाकर 74,434.46 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 247.15 अंक (1.05%) टूटकर 23,396.35 पर आ गया. यह गिरावट सिर्फ लार्ज कैप कंपनियों तक सीमित नहीं है. मंझोले व छोटे आकार की कंपनियों के शेयरों में भी जमकर मुनाफावसूली हावी है. निफ्टी मिडकैप 100 तथा निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1-1 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी है. सेक्टोरल मोर्चे पर तो तबाही मची है. ऑटो, मेटल, पीएसयू बैंक से लेकर रियल्टी इंडेक्स तक लाल निशान में धंस चुके हैं.
गिरावट के तूफान में डटे रहे ये शेयर
इस चौतरफा बिकवाली के बीच सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल तीन दिग्गज आईटी स्टॉक्स- इंफोसिस, टेक महिंद्रा व टीसीएस ही हरे निशान में खुद को बचा पाए हैं. बीएसई पर आज कुल 3075 शेयरों में ट्रेडिंग हो रही है, जिनमें से 2107 शेयरों में भारी गिरावट का रुझान है. सिर्फ 780 शेयर ही मजबूती दिखा पा रहे हैं, जबकि 188 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ. बाजार की इस भारी उठापटक के बावजूद 42 शेयर अपने एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने में कामयाब रहे, जबकि 33 शेयर एक साल के निचले स्तर पर लुढ़क गए. इसके अलावा 61 शेयरों में जहां अपर सर्किट लगा है, वहीं 95 शेयर लोअर सर्किट की गिरफ्त में आ गए हैं.
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