नई दिल्ली। IPL 2026 Closed Doors: आईपीएल के 19वें सीजन पर महंगाई का ग्रहण लगता नजर आ रहा है। दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने 17 मई को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया को एक लेटर लिखा है और आईपीएल 2026 में बदलाव की मांग की है। बढ़ती पर्यावरणीय और आर्थिक चिंताओ को देखते हुए उन्होंने मांग की है कि टूर्नामेंट के बाकी मैच सिर्फ कुछ चुनिंदा वेन्यू पर और बिना दर्शकों के कराए जाएं।
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CTI ने बिना दर्शकों के IPL मैच कराने की मांग क्यों की?
दरअसल, CTI यानी चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री का मानना है कि देश में पेट्रोल-डीजल पहले ही 3 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। इस बढ़ती महंगाई के बीच आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में भी फ्यूल की बचत के लिए जरूरी है। CTI ने इस बीच फैंस के मैच देखने स्टेडियम पहुंचने पर रोक लगाने की मांग की।
उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मैच देखने पहुंचे दर्शकों की गाड़ियों से हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल एक दिन में फुक जाता है। बिना दर्शकों के मैच होंगे तो ही बचत हो पाएगी। CTI ने सुझाव दिया कि मैच कुछ ही वेन्यू पर हों। अभी हर फ्रेंचाइजी सीजन में करीब 10 चार्टर फ्लाइट लेती है। एक प्लेन 1 घंटे में 2,400 से 3,000 लीटर ATF फूंकता है। एक टीम ही 50,000 से 70,000 लीटर फ्यूल उड़ा देती है।
IPL टीमों की हवाई यात्रा में कितना फ्यूल लगता है?
CTI के लेटर के अनुसारस आईपीएल टीमों के आने-जाने में भी बहुत ज्यादा फ्यूल खर्च होता है। फ्रेंचाइजी टीमें Boeing 737 और Airbus A320 जैसे चार्टर प्लेन इस्तेमाल करती हैं। ये प्लेन 1 घंटे में ही 2,400 से 3,000 लीटर एविएशन फ्यूल यानी ATF पी जाते हैं। सीजन में हर टीम करीब 10 फ्लाइट लेती है। ऐसे में सिर्फ हवाई सफर में ही एक फ्रेंचाइजी 50,000 से 70,000 लीटर फ्यूल खर्च कर देती है।
इसके अलावा एक IPL मैच देखने करीब 50,000 फैंस स्टेडियम आते हैं। मैच वाले दिन हजारों गाड़ियां स्टेडियम आती-जाती हैं। इससे भी हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल हर दिन खर्च होता है और प्रदूषण बढ़ता है।





