Uttarakhand Hidden Spots:गर्मियों की छुट्टियों में अगर आप किसी ऐसी जगह घूमने का सपना देख रहे हैं, जहां बर्फ से ढके पहाड़, रंग-बिरंगे फूलों की चादर और बादलों के बीच छिपी शांत वादियां एक साथ देखने को मिलें, तो उत्तराखंड की फ्लावर ऑफ वैली आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकती है. जून का महीना शुरू होते ही यह खूबसूरत जगह टूरिस्ट के लिए खुलने वाली है और यहां का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं लगता. दूर-दूर तक फैले रंगीन फूल, ठंडी हवाएं और पहाड़ों के बीच बहती छोटी-छोटी नदियां हर किसी का दिल जीत लेती हैं. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में ट्रैवल लवर्स यहां पहुंचते हैं.

शहरों की भीड़-भाड़ और गर्मी से दूर यह हिडन स्पॉट उन लोगों के लिए किसी सुकून भरी दुनिया जैसा है, जो नेचर के करीब वक्त बिताना चाहते हैं. चलिए इस आर्टिकल में आपको भी बताते हैं किस दिन ये वैली खुलने वाली है. यहां कैसे पहुंच सकते हैं और पूरी ट्रिप में कितना पैसा खर्च होगा.
जून में खुलने जा रही वैली ऑफ फ्लावर
वैली ऑफ फ्लावर उत्तराखंड के खूबसूरत स्पॉट्स में से एक है. ये इतनी खास इसलिए भी है क्योंकि साल में सिर्फ 4 महीने के लिए खुलती है. यानी जून से सितंबर के बीच ही आप यहां घूम सकते हैं. इस साल 1 जून से वैली ऑफ फ्लावर टूरिस्ट के लिए ओपन हो रही है, जहां अपने आसपास खूबसूरत रंग-बिरंगे फूलों का नजारा देख सकेंगे. ये जगह इतनी खूबसूरत है कि यहां से वापस आने का ही दिल नहीं करेगा. ये जगह उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से लगभग 3,352 मीटर से 3,658 मीटर (लगभग 11,000 से 12,000 फीट से ज्यादा) की ऊंचाई पर स्थित है.
वैली ऑफ फ्लावर्स में क्या-क्या करें एक्सप्लोर
वैली ऑफ फ्लावर्स में घूमने के साथ-साथ कई रोमांचक एक्टिविटी भी की जा सकती हैं. यहां ट्रेकिंग सबसे पॉपुलर एक्टिविटी है, क्योंकि घाटी तक पहुंचने का रास्ता बेहद खूबसूरत पहाड़ों और जंगलों से होकर गुजरता है. 10 किलोमीटर की ट्रेकिंग करने के बाद आपको जन्नत सा नजारा देखने को मिलेगा. रास्ते इतने खूबसूरत हैं कि आप हर जगह को अपने कैमरे में कैद करना चाहेंगे. इसके अलावा यहां बर्ड वॉचिंग और कैंपिंग का एक्सपीरियंस भी ले सकते हैं. यहां एक Hemkund Sahib गुरुद्वारा है जिसके दर्शन कर सकते हैं.
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दिल्ली से कैसे पहुंचे वैली ऑफ फ्लावर्स?
दिल्ली से वैली ऑफ फ्लावर्स पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले हरिद्वार या फिर ऋषिकेश पहुंचना होगा. इसके बाद आपको वहां से शेयर टैक्सी लेकर गोविंद घाट पहुंचना है. आप चाहें तो बाइक रेंट पर लेकर भी जा सकते हैं, जहां रास्ते में आपको खूबसूरत पहाड़ और झरने देखने को मिलेंगे. गोविंद घाट पहुंचने के बाद आपको पुलना गांव तक जाना है, जहां जाने के लिए आपको प्राइवेट टैक्सी मिल जाएगी. यहां पहुंचकर आपको 10 किलोमीटर का ट्रेक करे पहुंचना होगा घंघरिया. यहां आप एक रात रुक भी सकते हैं. जहां होटल और होम स्टे कम दामों पर मिल जाते हैं. अगले दिन सुबह जल्दी उठे और 4 किलोमीटर की ट्रेक करके पहुंच जाएं वैली ऑफ फ्लावर्स, जिसे देख आपको लगेगा मानो स्वर्ग धरती पर ही उतर आया हो.
इन बातों का रखें ध्यान
बता दें कि, वैली ऑफ फ्लावर्स में मौसम कभी भी बदल जाता है. इसलिए अपने साथ जैकेट, कोट्स, रेनकोट और अच्छे शूज जरूर लेकर जाएं. ताकि ट्रेक करने में आसानी हो. यहां घूमने का सही बेस्ट समय होता है जुलाई से अगस्त…क्योंकि इस समय पूरी वैली फूलों से सजी होती है.





