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अभी अभीः पेट्रोल और डीजल की सीमा की गई तय! जानें पूरी खबर विस्तार से

Petrol-Diesel Limit: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से देश के पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर पड़ने वाले असर को लेकर पीएम मोदी ने लोगों को आगाह किया हुआ है। इसी बीच देश के दक्षिणी राज्य केरल से एक बड़ी खबर सामने आई है। अगर आप केरल में रहते हैं या वहां की यात्रा करने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है।

अभी अभीः पेट्रोल और डीजल की सीमा की गई तय! जानें पूरी खबर विस्तार से
अभी अभीः पेट्रोल और डीजल की सीमा की गई तय! जानें पूरी खबर विस्तार से

केरल के पेट्रोल पंपों पर अब ईंधन की बिक्री को लेकर नई सीमा तय कर दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति एक बार में ₹5000 से ज्यादा का पेट्रोल और 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं खरीद पाएगा। यह कदम सप्लाई को मैनेज करने और अचानक स्टॉक खत्म होने से बचने के लिए उठाया गया है।

क्यों लगाई गई ये पाबंदी?

केरल स्टेट पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार, यह फैसला तेल की कमी की वजह से नहीं, बल्कि डिस्ट्रब्यूशन को मैनेज करने के लिए लिया गया है। तेल कंपनियां अब पंपों को लंबी अवधि के बजाय केवल कुछ दिनों का स्टॉक ही दे रही हैं। पंपों के लिए अब ‘क्रेडिट’ सिस्टम खत्म कर दिया गया है और उन्हें एडवांस पेमेंट करना पड़ रहा है, जिससे उनकी वर्किंग कंडीशन पर असर पड़ा है।

शहरी इलाकों के पंपों पर रोजाना करीब 10,000 लीटर डीजल की खपत होती है। ऐसे में भारी मांग के समय अचानक स्टॉक नील न हो जाए, इसलिए यह लिमिट तय की गई है।

आम आदमी और ट्रांसपोर्टर्स पर क्या होगा असर?

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दोपहिया और कार मालिकों पर इसका असर कम पड़ेगा, क्योंकि ₹5000 में सामान्यतः कार का टैंक फुल हो जाता है। ट्रक मालिकों, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर्स और बड़े औद्योगिक ग्राहकों को इस नियम से परेशानी हो सकती है, क्योंकि उन्हें अब बार-बार पंप के चक्कर लगाने होंगे।

देश में तेल का कितना स्टॉक है?

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त भंडार है:

क्रूड ऑयल: करीब 2 महीने का स्टॉक।
नेचुरल गैस: करीब 2 महीने का स्टॉक।
LPG: लगभग डेढ़ महीने की सप्लाई सुरक्षित है।

खाड़ी युद्ध से तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

भले ही देश में स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव डाल दिया है। अनुमान है कि कंपनियां रोजाना हजारों करोड़ रुपये का घाटा झेल रही हैं, जिसका असर सप्लाई चेन और डिस्ट्रब्यूशन पर दिख रहा है।

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