मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह गिर गए. सेंसेक्स और निफ्टी ने लगभग 2 फीसदी का गोत लगाया, जिससे नुकसान और बढ़ गया. इसकी वजह थी रुपए का अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचना, तेल की बढ़ती कीमतें और दूसरे ऐसे कारण जिनसे निवेशक घबरा गए. सेंसेक्स 1,456 अंकों से ज्यादा गिरकर 74,559 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 436 अंकों से ज्यादा गिरकर 23,379 पर बंद हुआ. ऐसा तब हुआ जब इंडिया विक्स, जो बाजार में उतार-चढ़ाव को मापता है, 4 फीसदी बढ़कर 19.26 पर पहुंच गया. इस गिरावट से BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा साफ हो गए, जिससे यह घटकर 457 लाख करोड़ रुपए रह गया.

इन शेयरों में आई बड़ी गिरावट
टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस और इंफोसिस जैसे आईटी स्टॉक्स सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरने वाले स्टॉक्स में शामिल थे. ये 3-4 फीसदी नीचे गिर गए क्योंकि ओपनएआई के एक नए लॉन्च ने एआई से होने वाले बदलावों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं. अडानी पोर्ट और टाइटन के शेयर भी लगभग 4 फीसदी गिर गए और सबसे ज्यादा गिरने वाले स्टॉक्स की लिस्ट में आईटी की बड़ी कंपनियों के साथ शामिल हो गए. इस ट्रेंड के उलट, एनटीपीसी, एसबीआई और भारती एयरटेल के शेयर मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए.
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इन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट
बाजार में गिरावट का माहौल हर तरफ फैला हुआ दिखाई दिया. निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.5-3 फीसदी गिर गए और बेंचमार्क इंडेक्स से भी खराब प्रदर्शन किया. सेक्टर्स के हिसाब से, निफ्टी आईटी और निफ्टी रियलटी लगभग 4 फीसदी गिरकर सबसे ज्यादा नुकसान वाले सेक्टर्स के तौर पर उभरे, जबकि बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए. एनएसई पर लगभग 2,726 स्टॉक्स गिरे और 590 स्टॉक्स ऊपर चढ़े, जबकि 65 स्टॉक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ.
क्या कहते हैं जानकार?
जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड, विनोद नायर ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार दबाव में दिखाई दिए. इसकी वजह थी रुपया का रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों का पैसा बाहर जाना. उन्होंने बताया कि यह गिरावट हर तरफ दिखाई दी, जिसमें आईटी और रियलटी स्टॉक्स सबसे आगे थे. उन्होंने कहा कि आईटी स्टॉक्स का प्रदर्शन खराब रहा क्योंकि एआई से होने वाले प्राइसिंग प्रेशर और ओपनएआई द्वारा हाल ही में कंपनियों के लिए शुरू की गई नई पहलों के बाद संभावित बदलावों को लेकर चिंताएं बढ़ गईं.
कैसा रहेगा आगे का रुख?
निवेशक आने वाले घरेलू सीपीआई डेटा का इंतजार करते हुए दिखाई दिए. ताकि वे अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के असर का आकलन कर सकें. विश्लेषक ने आगे कहा कि कच्चे तेल और करेंसी से जुड़ी चिंताओं के कारण, नजदीकी भविष्य में बाजार का मूड अस्थिर रहने की संभावना है. अगर भू-राजनीतिक तनाव में कोई कमी आती है, तो मजबूत घरेलू बुनियादी बातों और स्थिर संस्थागत निवेश के सहारे बाज़ार में राहत भरी तेज़ी देखने को मिल सकती है.





