क्या आप जानते हैं कि अगर 24 घंटे के अंदर पेट साफ न हो, तो आंतों में जमा मल ‘री-एब्जॉर्प्शन’की प्रक्रिया शुरू कर देता है? मेडिकल भाषा में कहें तो, लंबे समय तक कब्ज रहने से शरीर में टॉक्सिन्स दोबारा सोख लिए जाते हैं, जिससे न केवल सुस्ती और गैस जैसे पाचन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं बल्कि कोलन इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों मानते हैं कि पेट की हर बीमारी की जड़ खराब डाइजेशन है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए आयुर्वेदिक एक्सपर्ट पतंजलि के वैध डॉक्टर योगेश कुमार ने बताया कि कब्ज के लिए खराब डाइट और बॉडी की एक्टिविटी में कमी जिम्मेदार है। Dr. Yogesh Kumar पतंजली में पिछले 12 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

एक्सपर्ट ने बताया आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी बॉडी की नैचुरल “बॉडी क्लॉक” धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही है। अनियमित खान-पान, देर रात तक जागना और समय पर न सोना-उठना हमारी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। काम की बढ़ती व्यस्तता के कारण लोग समय पर खाना नहीं खा पाते, जिसका सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। इसके अलावा कम पानी पीने की आदत भी डाइजेशन को कमजोर बना रही है और कब्ज जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे रही है। एक्सपर्ट ने बताया अगर आप कब्ज से निजात पाना चाहते हैं तो अपनी डाइट में ये 5 बदलाव करें आपको फायदा होगा।
आंत में मल क्यों जमा होता है?
आंतों में मल जमा होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा डाइट में फाइबर की कमी होना, बॉडी एक्टिविटी में कमी होना और लम्बे समय तक तनाव में रहना कब्ज को बढ़ाता है। जब हमारी आंत जो कुछ भी हम खाते हैं उसे ऑब्जर्ब नहीं कर पाती तो हमें खाने का कुछ भी फायदा नहीं मिलता। लम्बे समय तक कब्ज रहने की वजह से मल आंतों में जमा होने लगता है और आंतों में कई तरह की परेशानियां पैदा करता है।
कब्ज का इलाज कैसे करें
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रेशेदार फल और सब्जियों को बनाएं डाइट का हिस्सा
कब्ज़ की समस्या से राहत पाने के लिए पाचन तंत्र को एक्टिव रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए आंतों की मूवमेंट यानी बाउल मूवमेंट सही होना चाहिए, और इसमें फाइबर से भरपूर फल व सब्जियां अहम भूमिका निभाते हैं। फाइबर मल को नरम बनाता है और उसे आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे पेट साफ रहता है और कब्ज़ की परेशानी कम होती है।
खासतौर पर मौसम के अनुसार मिलने वाली ताज़ी सब्जियां और फल पाचन के लिए ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं। मूली, गाजर और चुकंदर जैसी सब्जियां फाइबर के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स से भी भरपूर देती हैं, जो आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। वहीं पपीता और नाशपाती जैसे फल पाचन को बेहतर बनाते हैं और पेट को हल्का महसूस कराते हैं। इसके अलावा सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियां, छिलके सहित फल और साबुत अनाज को अपनी डाइट में शामिल करें आपको फायदा होगा। याद रखें कि ज्यादा फाइबर का सेवन करें तो पानी का इंटेक बढ़ाएं क्योंकि ज्यादा फाइबर कब्ज बढ़ा सकता है।
आंवला जूस से पाचन को मिल सकती है राहत
कब्ज़ की समस्या को कम करने के लिए आंवला एक प्राकृतिक और असरदार उपाय माना जाता है। आंवला विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और आंतों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से पेट साफ रखने और गैस, अपच जैसी समस्याओं से राहत पाने में मदद मिल सकती है। रात में कुछ ताज़े आंवले पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उसी पानी को हल्का उबाल लें और गुनगुना होने पर खाली पेट पिएं। यह ड्रिंक शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। माना जाता है कि इससे पेट में जमा गंदगी आसानी से बाहर निकलती है और मल त्याग में आसानी होती है।
दिनभर सही तरीके से पिएं पानी
कब्ज़ से बचने और पाचन को दुरुस्त रखने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से मल नरम रहता है और उसे बाहर निकालने में आसानी होती है। लेकिन पानी पीने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना पानी का सेवन। एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय दिनभर थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीना शरीर के लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हर थोड़ी देर में छोटे-छोटे घूंट लेकर पानी पीने से शरीर उसे बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। इससे मुंह का सलाइवा भी पानी के साथ मिल जाता है, जो पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। सुबह उठने के बाद गुनगुना पानी पीना, खाने के बीच पर्याप्त पानी लेना और कैफीनयुक्त ड्रिंक्स की मात्रा सीमित रखना भी पेट को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।
सुबह योगासन से करें दिन की शुरुआत
अगर आप कब्ज़ का नेचुरल तरीके से उपचार करना चाहते हैं तो सुबह हल्का योगासन करें। तिर्यक ताड़ासन, कटिचक्रासन, तिर्यक भुजंगासन और उत्कटासन जैसे आसन पेट और आंतों पर सकारात्मक असर डालते हैं। ये आसन पेट की मांसपेशियों को एक्टिव करते हैं, जिससे बाउल मूवमेंट बेहतर हो सकता है और पेट साफ होने में मदद मिलती है। नियमित रूप से सुबह कुछ मिनट योग करने से गैस, अपच और पेट भारी रहने जैसी परेशानियों में भी राहत मिल सकती है। अगर किसी को कमर, घुटनों या रीढ़ से जुड़ी समस्या हो तो विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही योग करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता और घरेलू उपायों पर आधारित है। कब्ज़ या पाचन से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहे, पेट में तेज दर्द, खून आना, उल्टी या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी योगासन या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की राय लेना बेहतर होता है।





