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ना सोना महंगा होगा, ना चांदी! सरकार का टैक्स बढ़ाने का कोई इरादा नहीं

बीते कुछ दिनों से बाजार में इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज थी कि सरकार सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने जा रही है. रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान के बाद इन अटकलों को और बल मिला था. पीएम ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए आयातित ईंधन, सोने के आभूषणों और विदेशों में होने वाले खर्च को कम करने की जरूरत पर जोर दिया था. इस बयान के बाद सबके मन में सवाल था कि क्या अब विदेश यात्रा महंगी हो जाएगी या सोना खरीदना जेब पर भारी पड़ेगा. लेकिन अब वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है.

Khabar Monkey

ना सोना महंगा होगा, ना चांदी! सरकार का टैक्स बढ़ाने का कोई इरादा नहीं
ना सोना महंगा होगा, ना चांदी! सरकार का टैक्स बढ़ाने का कोई इरादा नहीं

सोने-चांदी की कीमतों पर क्या है सरकार का प्लान?

त्योहारी और शादी के सीजन में सोने-चांदी की खरीदारी हर भारतीय परिवार का एक अहम हिस्सा होती है. ऐसे में आयात शुल्क बढ़ने की खबर सीधे आम आदमी के बजट पर असर डालती है. सरकारी सूत्रों ने यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा समय में सोने और चांदी पर टैरिफ यानी आयात शुल्क में किसी भी तरह की बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है. इसका मतलब यह है कि सरकार की तरफ से फिलहाल ऐसा कोई वित्तीय उपाय नहीं किया जा रहा है जिससे इन कीमती धातुओं की कीमतें अचानक आसमान छूने लगें. देश के बढ़ते आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बावजूद, सरकार अभी आम उपभोक्ताओं की मांग को प्रभावित नहीं करना चाहती है.

इंटरनेशनल कार्ड के इस्तेमाल पर क्या है अपडेट?

महामारी के बाद से भारतीयों का विदेश जाने और वहां खर्च करने का रुझान तेजी से बढ़ा है. इंटरनेशनल कार्ड्स के जरिए होने वाले लेन-देन से विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है. बाजार में यह भी चर्चा थी कि सरकार विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्ड के इस्तेमाल पर कुछ पाबंदियां लगा सकती है. हालांकि, सूत्रों ने इन सभी कयासों को खारिज कर दिया है. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल कार्ड्स पर किसी भी तरह का कोई आयात प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. यानी अगर आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं या अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट्स से खरीदारी करते हैं, तो आपको अभी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.

अचानक क्यों उठी थी पाबंदियों की चर्चा?

दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है. इसके साथ ही, हम दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से एक हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और घरेलू स्तर पर सोने व इलेक्ट्रॉनिक सामानों की लगातार मांग के कारण भारत का आयात बिल काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. आयात बढ़ने से देश का व्यापार घाटा बढ़ता है. वित्त मंत्रालय के आर्थिक सर्वेक्षण में भी इस बात का जिक्र किया गया था कि चालू खाते के घाटे (करेंट अकाउंट डेफिसिट) को प्रबंधित करने के लिए संतुलित कदम उठाने की जरूरत है. यही कारण था कि पीएम ने आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी से खपत करने की बात कही थी, जिसे बाजार ने संभावित पाबंदियों के रूप में देख लिया था.

अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत पर क्या है अपडेट

इन घरेलू आर्थिक चिंताओं के बीच वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भी कुछ अहम गतिविधियां हो रही हैं. सूत्रों ने संकेत दिया है कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत आने वाले हफ्तों में तेज हो सकती है. उम्मीद है कि अगले महीने अमेरिकी व्यापार दल भारत का दौरा करेगा, हालांकि अभी इसकी तारीख तय नहीं हुई है. भारत और अमेरिका लंबे समय से डिजिटल व्यापार, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीक जैसे अहम सेक्टर्स में व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और पुराने विवादों को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं.

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