Ghaziabad News: दिल्ली से सटे गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट के विस्तार की तैयारी अब तेज हो गई है. एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों की बढ़ती संख्या और अधिक शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू करने की योजना के तहत विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके लिए कुल 14 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है. प्रशासन ने 6.8 एकड़ जमीन खरीदने के लिए किसानों से सहमति बना ली है, जबकि बाकी 7.2 एकड़ जमीन के लिए बातचीत जारी है. जिला प्रशासन की ओर से शासन को इसका प्रस्ताव भेज दिया गया है.

वर्तमान में हिंडन एयरपोर्ट से बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, वाराणसी, अयोध्या और लखनऊ जैसे सीमित शहरों के लिए उड़ानें संचालित हो रही हैं. विस्तार के बाद यहाँ से देश के कई नए शहरों के लिए फ्लाइट्स शुरू की जा सकेंगी.
क्षेत्रफल 3 गुना तक बढ़ेगा, यात्रियों को मिलेगा बड़ा फायदा
हिंडन एयरपोर्ट का वर्तमान क्षेत्रफल लगभग 7.5 एकड़ है. 14 एकड़ अतिरिक्त जमीन मिलने के बाद इसका कुल क्षेत्रफल 21.5 एकड़ से अधिक हो जाएगा. एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि बढ़ते यात्रियों के दबाव को देखते हुए पार्किंग एरिया, विमान खड़े करने की जगह (एप्रन) और चेक-इन काउंटर्स की संख्या बढ़ाने की जरूरत है.
अधिकारियों के अनुसार, विस्तार के बाद गाजियाबाद और आसपास के लोगों की दिल्ली (IGI) या जेवर एयरपोर्ट पर निर्भरता कम होगी. आनंद विहार और गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से नजदीकी होने के कारण यह यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती साबित होगा.
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जमीन खरीद की प्रक्रिया में आई तेजी
जमीन की कीमतों को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच लंबे समय से अटका मामला अब सुलझ गया है. तय सहमति के अनुसार, सड़क किनारे की जमीन के लिए 24 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर और अंदर की जमीन के लिए 22 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर तय की गई है. लगभग 6.5 एकड़ जमीन की खरीद पर 63 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जो प्रदेश सरकार उपलब्ध कराएगी.
गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ बैठकें कर इस परियोजना की मजबूत पैरवी की है. अगस्त 2025 में गठित समिति की सक्रियता से अब यह प्रक्रिया गति पकड़ रही है.
पश्चिमी यूपी का बनेगा बड़ा ‘एयर हब’
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंडन एयरपोर्ट भविष्य में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ा एयर हब बनेगा. इसका सीधा लाभ गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़ और बुलंदशहर के लोगों को मिलेगा. विस्तार कार्य पूरा होने के बाद कई नई घरेलू उड़ानें शुरू होंगी, जिससे दिल्ली एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा और यात्रियों को उनके नजदीकी शहर से ही सीधी फ्लाइट मिल सकेगी.





