पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से गैर जरूरी सोने की खरीद को 1 साल तक न करने की अपील की है और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है. सरकार का मानना है कि अगर गोल्ड इंपोर्ट घटता है तो भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सकता है. हालांकि, इस अपील का असर सीधे ज्वेलरी इंडस्ट्री और शादी सीजन की मांग पर पड़ सकता है.

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर्स में शामिल है. देश अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से खरीदता है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में डॉलर खर्च होते हैं. ऐसे समय में जब कच्चा तेल भी महंगा हो रहा है, सरकार नहीं चाहती कि आयात बिल और बढ़े. इसी वजह से पीएम मोदी ने लोगों से जरूरी खर्च को प्राथमिकता देने और सोने की खरीद को सीमित रखने की सलाह दी है.
ज्वेलरी मार्केट पर असर
यदि लोग सरकार की अपील को गंभीरता से लेते हैं तो शादी और त्योहारों के सीजन में गोल्ड ज्वेलरी की मांग कमजोर पड़ सकती है. इसका असर सर्राफा कारोबारियों, ज्वेलरी रिटेल चेन और छोटे सुनारों की बिक्री पर दिखाई दे सकता है. पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, ऐसे में उपभोक्ता पहले से ही खरीदारी को लेकर सतर्क हैं.
इकोनॉमी पर क्या होगा असर
दूसरी तरफ अगर अर्थव्यवस्था के नजरिए से देखें तो गोल्ड इम्पोर्ट कम होने का फायदा सरकार को मिल सकता है. इससे डॉलर की बचत होगी, चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहेगा और विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलेगा. तेल और सोने के बढ़ते आयात बिल से रुपये पर बनने वाला दबाव भी कुछ कम हो सकता है. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कुल 10 बड़ी अपीलें की, जिनमें उन्होंने आर्थिक अनुशासन पर जोर दिया. ऐसे में आने वाले महीनों में उपभोग और निवेश से जुड़े व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है.
Khabar Monkey
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