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UP News: योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा नया सोशल इंजीनियरिंग मॉडल – PDA बनाम PDA…

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की बड़ी राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है। बीजेपी ने इस विस्तार के जरिए जातीय संतुलन साधने की कोशिश की है। छह नए मंत्रियों में एक अगड़ी जाति, तीन ओबीसी और दो दलित चेहरों को शामिल कर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले चुनाव में सामाजिक समीकरण सबसे बड़ा हथियार बनने वाले हैं।

UP News: योगी कैबिनेट विस्तार में दिखा नया सोशल इंजीनियरिंग मॉडल – PDA बनाम PDA…
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PDA फार्मूले का जवाब?

Khabar Monkey

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पिछले कई महीनों से PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फार्मूले को लगातार मजबूत करने में जुटे हैं। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पिछड़े और दलित वोट बैंक में नुकसान झेलना पड़ा था। ऐसे में योगी सरकार का यह कैबिनेट विस्तार उसी रणनीति की काट के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी ने ओबीसी और दलित नेताओं को जगह देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी हर वर्ग को प्रतिनिधित्व दे रही है।

मनोज पांडे से ब्राह्मण संदेश

कैबिनेट विस्तार में मनोज पांडे को शामिल किए जाने को ब्राह्मण वोट बैंक साधने की कोशिश माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से विपक्ष बीजेपी पर अगड़ी जातियों की नाराजगी का दावा करता रहा है। ऐसे में बीजेपी ने संतुलन बनाते हुए अगड़ा, पिछड़ा और दलित तीनों समीकरणों को साधने का प्रयास किया है।

2027 पर बीजेपी की नजर

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह विस्तार सीधे तौर पर मिशन 2027 की तैयारी है। पश्चिम यूपी से लेकर अवध और पूर्वांचल तक जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर चेहरे चुने गए हैं। बीजेपी अब हिंदुत्व के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व की राजनीति को भी बराबर महत्व देती दिखाई दे रही है।

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