Hamirpur News: हमीरपुर में यमुना नदी में नाव पलटने के बाद चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरकार 18 घंटे बाद पूरा हो गया. हादसे में लापता सभी 6 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं. लगातार बारिश और नदी के तेज बहाव के बीच NDRF, SDRF और फ्लड पीएसी की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर शवों को नदी से बाहर निकाला. हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.

जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम यमुना नदी में एक नाव पलट गई थी. नाव में 8 बच्चों समेत कुल 9 लोग सवार थे. हादसे के दौरान नाविक ने किसी तरह 3 लोगों की जान बचा ली, लेकिन एक महिला और 6 बच्चे नदी में डूब गए थे. घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया.
18 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF की चार टीमें, SDRF की दो टीमें और फ्लड पीएसी की एक टीम को लगाया गया था. करीब 100 जवानों ने लगातार 18 घंटे से अधिक समय तक अभियान चलाया. टीमों ने नदी में जाल डालकर और करीब आठ किलोमीटर तक सर्च ऑपरेशन चलाकर सभी शवों को बरामद किया.
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हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें राजू निषाद की 25 वर्षीय मौसी ब्रजरानी, 14 वर्षीय अर्चना, 12 वर्षीय आकांक्षा, मौसेरा भाई लाव्यांश, 9 वर्षीय रानी और आदित्य शामिल हैं. बताया जा रहा है कि राजू निषाद की बेटी अंजली की शादी के बाद परिवार के शाम के समय नाव पर सवार होकर यमुना पार तरबूज खाने गए थे. वापस लौटते समय यह हादसा हो गया.
परिजनों से मिलीं पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति
घटना के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. घाट किनारे बैठे परिजन देर तक अपने बच्चों और रिश्तेदारों के सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए रहे, लेकिन नदी से केवल शव ही बरामद हो सके. पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है. मौके पर पहुंचीं राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी. साथ ही मृतकों के परिजनों को 4.25 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान भी किया.
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ADG ने घटनास्थल का किया निरीक्षण
वहीं एडीजी जोन प्रयागराज ज्योति नारायण ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए. फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं. सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है.
घटना के बाद से ही डूबे बच्चों के मां-बाप और परिवार के लोग घाट किनारे बैठे थे. बच्चों के मां-बाप पथराई आंखों से अपने लापता हुए बच्चों को ढूंढ़ने की गुहार लगा रहे थे. उनको अपने मासूमों के जिंदा होने की उम्मीद थी, लेकिन आज जब सभी के शव मिले तो उन उम्मीदों ने भी दम तोड़ दिया. घाट किनारे ही परिजन रोने-बिलखने लगे.





