
पटना: देश के 10 प्रदेशों से अप्रैल में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों को भरने के लिए चुनाव की अधिसूचना आज चुनाव आयोग जारी कर रहा है। इन 37 सीटों में बिहार की 5 सीटें भी हैं, जिनके मौजूदा पदधारक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है। सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से हरिवंश और रामनाथ हैं। कुशवाहा की खुद की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) है, जो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सहयोग से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसद हैं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से प्रेमचंद और एडी सिंह हैं, जिनमें बमुश्किल से भी मुश्किल हाल में कोई एक ही वापस संसद जा सकता है।
बिहार में सत्ता पक्ष के पास 202 विधायक हैं, जिनमें बीजेपी के 89, जेडीयू के 85, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास (लोजपा-आर) के 19, जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) के 5 और कुशवाहा की रालोमो के 4 विधायक शामिल हैं। विपक्ष बंटा हुआ है। लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन में राजद के 25, कांग्रेस के 6, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (सीपीआई-एमएल) के 2, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के 1 और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के 1 कुल 35 विधायक हैं। 243 सीटों की विधानसभा में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन और विपक्ष के महागठबंधन के पास कुल 237 विधायक हैं। बचे 6 विधायक हैं विपक्ष में ही, लेकिन इंडिया गठबंधन से अलग हैं। इसमें असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के 5 और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के 1 विधायक शामिल हैं। हरिवंश या रामनाथ में एक ही लौटेगा संसद! जेडीयू से किस दूसरे नेता को राज्यसभा भेजेंगे नीतीश? राज्यसभा चुनाव को लेकर जो बयानबाजी और मुलाकात दिख रही है, उससे अभी तक विपक्षी खेमे में कोई एकता नहीं है। राज्यसभा चुनाव के नियमों के मुताबिक 5 सीटों के चुनाव की स्थिति में किसी भी कैंडिडेट को बिहार से जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। लेकिन, मतदान तब होगा जब 5 सीट के लिए कोई छठा या सातवां कैंडिडेट आ जाए। 5 सीट पर 5 कैंडिडेट हुए तो सारे निर्विरोध चुन लिए जाएंगे।
बिहार में एनडीए की 4 सीट पक्की, 6 कैंडिडेट लड़ गए तो मतदान भी पक्का सत्तारूढ़ एनडीए के पास 202 विधायक हैं तो 5 में 4 सीट पर उनकी जीत पक्की है। 5वीं सीट पर एनडीए को सीधे गणित से 3 वोट कम पड़ रहे हैं। लेकिन राज्यसभा चुनाव में कोई पार्टी अपने विधायकों को जिस कैंडिडेट को वोट देने कहती है, उसे कुछ एक्स्ट्रा वोट भी देती है। मतलब, अगर जरूरत 41 वोट की है तो कैंडिडेट को वोट करने के लिए पार्टी 45 विधायकों को कह सकती है, ताकि कोई वोट कैंसिल हो जाए तो नतीजे ना बिगड़ जाएं। 41 विधायक के हिसाब से 164 विधायक के साथ एनडीए 4 सीट निकाल सकती है। लेकिन सावधानी बरतने के लिए हर कैंडिडेट को 2-4 एक्स्ट्रा वोट भी दिए तो एनडीए को भी 5वीं सीट के लिए ठीक-ठाक वोट कम पड़ेंगे। ऐसे में विपक्ष में तोड़-फोड़ करके क्रॉस वोटिंग करवाने या दूसरी वरीयता के बहुत सारे वोट लाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा या रीना पासवान, बिहार से किस-किस को राज्यसभा भेजेगी भाजपा? एनडीए में सब कुछ बीजेपी और नीतीश कुमार और थोड़ा-बहुत चिराग पासवान तय करने की हालत में हैं। जेडीयू अपनी दोनों सीटें खुद रखेगी, यह तय है। बीजेपी 2 सीट आराम से निकाल सकती है, लेकिन वो पवन सिंह की तरह खुद का नेता भेजेगी या उपेंद्र कुशवाहा या चिराग पासवान की मां रीना पासवान की तरह गठबंधन दलों के कैंडिडेट को, ये साफ नहीं हो पा रहा है। गृहमंत्री अमित शाह बिहार में हैं तो, लेकिन पटना की राजनीति से दूर सीमांचल में सरकारी कामकाज में बिजी हैं। लेकिन अब जब चुनाव के लिए नामांकन शुरू हो गया है और होली के अगले दिन 5 मार्च को पर्चा भरने का आखिरी दिन है तो इस सवाल को बहुत लंबे समय तक टाला नहीं जा सकेगा।
विपक्ष के पास 1 सीट जीतने के लिए पक्के 41 वोट हैं, लेकिन एकता नहीं विपक्ष एकजुट हो जाए तो उसके पास पूरे-पक्के 41 वोट हैं। महागठबंधन के 35, AIMIM के 6 और बसपा के 1 एमएलए। लेकिन विपक्ष विधानसभा चुनाव की तरह बिखरा हुआ है। सिर्फ बिखरा ही नहीं, बल्कि झगड़ भी रहा है। राजद की 2 सीट खाली हो रही है और सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी वही है तो उसका दावा स्वाभाविक है, लेकिन ओवैसी की पार्टी खुलकर कह रही है कि वो सिर्फ वोट देने के लिए नहीं हैं। एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने विपक्षी महागठबंधन से कहा है कि ओवैसी कैंडिडेट दें और वो लोग समर्थन करें तो एनडीए को 5वीं सीट पर रोका जा सकता है और विपक्ष से एक नेता राज्यसभा जा सकता है।
हिना शहाब को राज्यसभा लड़ाकर ओवैसी का शिकार करेंगे लालू-तेजस्वी? करीबी MLA ने दिया संकेत लालू और तेजस्वी अभी तक मन नहीं बना पाए हैं। उनके विधायक भाई वीरेंद्र पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की बीवी हिना शहाब का नाम उछाल रहे हैं। कह रहे हैं कि हिना शहाब को उम्मीदवार बनाने से एक तीर से कई शिकार हो जाएंगे। वीरेंद्र का इशारा है कि मुस्लिम कैंडिडेट देने से ओवैसी को जिद छोड़ देनी पड़ेगी और समर्थन करना मजबूरी होगी। लेकिन उनके ऐसा कहने के बाद भी अख्तरुल ईमान के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। तेजस्वी मायावती का आशीर्वाद लेते रहे हैं, इसलिए बसपा के विधायक सतीश यादव का समर्थन हासिल करना थोड़ा आसान है। पेच फंसा रखा है ओवैसी की पार्टी ने। प्रेमचंद गुप्ता या एडी सिंह, तेजस्वी एक राज्यसभा सीट लड़ेंगे या एनडीए का क्लीन स्वीप? सूत्रों का कहना हैकि तेजस्वी यादव को अगर ओवैसी और मायावती से समर्थन का भरोसा नहीं मिल पाता है, तो यह संभव है कि विपक्ष कोई कैंडिडेट ही ना दे और एनडीए वॉक-ओवर के साथ 5 सीटों पर जीत हासिल कर ले। विपक्ष से एक भी कैंडिडेट आया तो मतदान तय हो जाएगा। फिर 41-41 वोट का जुगाड़ शुरू होगा। राजनीतिक तोड़-फोड़ में सरकार चलाने वाली पार्टी हमेशा फायदे में रहती है। कई बार क्रॉस वोटिंग और वोट कैंसिल से बीजेपी को फायदा हुआ है। बिहार राज्यसभा चुनाव: आईपी गुप्ता और ओवैसी की मुलाकात RJD की आफत या तेजस्वी को राहत? ऐसे में तेजस्वी या ओवैसी अगर कैंडिडेट उतारते हैं तो विपक्षी एकता पार्टी के स्तर पर भले ना टूटे, विपक्षी विधायकों के टूटने का खतरा रहेगा। एनडीए 5वीं सीट जीतने के लिए वो सब करेगी, जो हो सकता है। विपक्ष के कैंडिडेट को विपक्षी दलों के सारे वोट नहीं आए तो भद अलग पिटेगी। माना जा रहा है कि आईपी गुप्ता के जरिए लालू-तेजस्वी और ओवैसी के बीच बात चल रही है। लेकिन, अगर बात नहीं बनी और समीकरण सेट नहीं हुए तो इस बात के प्रबल आसार हैं कि विपक्ष बम बोल जाए और एनडीए बम-बम करते हुए 5 की 5 सीट जीत जाए।





