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आर्थिक संकट से जूझ रही एयरलाइंस को मिला सहारा! सरकार ने खोला ₹5,000 करोड़ का खजाना, यात्रियों को मिलेगा सस्ता सफर?

महंगे होते जेट फ्यूल और वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत की एविएशन इंडस्ट्री पर दबाव लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एयरलाइंस के लिए ₹5,000 करोड़ का इमरजेंसी क्रेडिट पैकेज मंजूर किया है। इससे मुश्किल में फंसी कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका फायदा यात्रियों को भी मिलेगा?

आर्थिक संकट से जूझ रही एयरलाइंस को मिला सहारा! सरकार ने खोला ₹5,000 करोड़ का खजाना, यात्रियों को मिलेगा सस्ता सफर?
आर्थिक संकट से जूझ रही एयरलाइंस को मिला सहारा! सरकार ने खोला ₹5,000 करोड़ का खजाना, यात्रियों को मिलेगा सस्ता सफर?

सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के तहत यह राहत दी है। इसके तहत एयरलाइंस को बैंक से लोन मिलेगा, जिसकी गारंटी सरकार देगी। हर एयरलाइन को अधिकतम ₹1,500 करोड़ तक का लोन मिल सकता है, जिससे वे अपने खर्चों को संभाल सकें।

महंगे फ्यूल ने बढ़ाई परेशानी

एयरलाइंस की सबसे बड़ी लागत जेट फ्यूल होती है, जो आमतौर पर 30-40% होती है। लेकिन हाल के महीनों में यह बढ़कर करीब 50% तक पहुंच गई है। वेस्ट एशिया में युद्ध, एयरस्पेस बंद होने और लंबी उड़ानों के कारण कंपनियों के खर्च में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

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कम हुई यात्रियों की संख्या

सिर्फ खर्च ही नहीं, बल्कि यात्रियों की संख्या में भी गिरावट देखने को मिली है। FY26 में घरेलू हवाई यात्रा की ग्रोथ घटकर करीब 1.3% रह गई, जो पहले 7% से ज्यादा थी। इससे एयरलाइंस की कमाई पर भी असर पड़ा है।

कैसे काम करेगा यह स्कीम?

  • 7 साल तक लोन चुकाने की सुविधा
  • पहले 2 साल तक EMI देने की जरूरत नहीं
  • एक्स्ट्रा लोन पर सरकार की गारंटी

इससे एयरलाइंस को तुरंत राहत मिलेगी और वे अपनी ऑपरेशन जारी रख सकेंगी।

क्या सस्ती होंगी फ्लाइट टिकट?

फिलहाल एयरलाइंस ने बढ़ते खर्च के कारण टिकट महंगे किए हैं और फ्यूल सरचार्ज भी लगाया है। यह पैकेज कंपनियों को राहत तो देगा, लेकिन तुरंत टिकट सस्ते होने की संभावना कम है। हालांकि, अगर हालात सुधरते हैं तो भविष्य में किराए में राहत मिल सकती है।

एयरलाइंस को क्यों थी इस मदद की जरूरत?

एयरलाइंस ने सरकार से मदद की मांग की थी, क्योंकि हालात ऐसे हो गए थे कि कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद करने की नौबत आ सकती थी। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस के जरिए कंपनियों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाई थी।

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