दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के संकट ने कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति को हिलाकर रख दिया है. लेकिन इन वैश्विक चुनौतियों के बीच, भारत अपनी मजबूत रणनीतियों के दम पर एक वैश्विक लीडर की तरह अडिग खड़ा है. कतर से गैस आपूर्ति में आई अंतरराष्ट्रीय रुकावटों को अवसर में बदलते हुए, भारत सरकार और देश की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी ‘पेट्रोनेट एलएनजी’ ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक शानदार रोडमैप तैयार किया है. इसका सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया में चाहे जो भी हालात हों, देशवासियों की रसोई और प्रगति के पहिये कभी न रुकें.

विश्वव्यापी संकट पर भारत की दूरदर्शी सोच
कतर और यूएई से आने वाली एलएनजी (LNG) पर दुनिया के कई देश निर्भर हैं. पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के कारण जब कतर एनर्जी ने ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) लागू किया, तो ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई. लेकिन भारत ने इस स्थिति को बेहद परिपक्वता और कुशलता के साथ संभाला है. बिना किसी अफरा-तफरी के, नीतियों को इस तरह से प्रबंधित किया गया कि घरों में पीएनजी (PNG), परिवहन के लिए सीएनजी (CNG) और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को निर्बाध गैस मिलती रहे.
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ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में ‘मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर बूस्ट’
भविष्य की किसी भी चुनौती को जड़ से खत्म करने के इरादे से, भारत ने अपने गैस स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का फैसला किया है. पेट्रोनेट एलएनजी के सीईओ ए.के. सिंह ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है. इसके तहत देश भर में 7 नए विशाल एलएनजी टैंक बनाए जाएंगे. अगले कुछ सालों में ओडिशा के गोपालपुर में दो, केरल के कोच्चि में एक और गुजरात के दाहेज टर्मिनल पर अतिरिक्त टैंकों का निर्माण किया जाएगा. यह सिर्फ एक कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर एक और मजबूत कदम है. इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘स्ट्रैटेजिक एलएनजी रिज़र्व’ (Strategic LNG Reserve) बनाने की तैयारी भी चल रही है, ताकि भारत किसी भी आपात स्थिति में पूरी तरह सुरक्षित रहे.
आम आदमी के हितों की रक्षा
सप्लाई में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में भारी उछाल आया. हाजिर बाजार (Spot Market) में एलएनजी की कीमतें 24-25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गई थीं, जो अब थोड़ी नरमी के साथ 16 डॉलर के करीब आ गई हैं. ऐसे में भारत ने शानदार आर्थिक सूझबूझ का परिचय दिया है. महंगी दरों पर घबराकर जल्दबाजी में नए दीर्घकालिक सौदे करने के बजाय, बाजार के शांत होने और कीमतें कम होने का इंतजार करने की नीति अपनाई गई है. सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि महंगी गैस का बोझ देश की जनता पर न पड़े. हमारे पास कतर और एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) के साथ पहले से ही बेहतरीन दीर्घकालिक अनुबंध हैं, जो हमारी बुनियाद को मजबूत रखते हैं.
भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार
भारत का मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से ही विश्वस्तरीय है. देश के 23 एलएनजी टैंकों में से 10 का सफल संचालन पेट्रोनेट कर रही है, जिन्होंने बीते वित्त वर्ष में 26.5 मिलियन टन विदेशी ईंधन को सफलता से हैंडल कर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है. इस साल जनवरी और फरवरी में भारत का गैस आयात रिकॉर्ड स्तर पर था. हालांकि, मार्च और अप्रैल में कतर से सप्लाई प्रभावित रही, लेकिन राहत की बात यह है कि कतर की गैस उत्पादन सुविधाएं सुरक्षित हैं और जल्द ही आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है. तब तक, भारत का विशाल बफर स्टॉक और सरकार की अचूक नीतियां देश को पूरी तरह ढाल दिए हुए हैं. भारत आज सिर्फ ऊर्जा का बड़ा उपभोक्ता नहीं है, बल्कि अपने बेहतरीन प्रबंधन से दुनिया के लिए एक मिसाल बन रहा है.




