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बंगाल चुनाव 2026: ‘मिशन 160’ के साथ मैदान में BJP, क्या टूटेगा ममता का किला?

बंगाल चुनाव 2026: ‘मिशन 160’ के साथ मैदान में BJP, क्या टूटेगा ममता का किला?
बंगाल चुनाव 2026: 'मिशन 160' के साथ मैदान में BJP, क्या टूटेगा ममता का किला?

पीएम मोदी, अमित शाह और ममता बनर्जी.

पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 से पहले शंखनाद हो चुका है. भारतीय जनता पार्टी ने अब 120 नहीं, बल्कि 170 विधानसभा सीटों पर फोकस तय किया है. लक्ष्य साफ है कि करीब 6.5 फीसदी वोट का अंतर खत्म कर सत्ता के करीब पहुंचना. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आक्रामक अभियान चलाया, लेकिन 77 सीटों पर सिमट गई. वोट प्रतिशत 38.15% रहा, जबकि टीएमसी 44.91% वोट के साथ 211 सीटें जीतकर सत्ता में लौटी. दोनों के बीच करीब 6.5 फीसदी का अंतर रहा.

अब बीजेपी ने 160 ऐसी सीटें चिन्हित की हैं, जहां उसे जीत की संभावना दिख रही है. पार्टी का मानना है कि अगर 5 से 7 फीसदी का स्विंग हो जाए, तो तस्वीर बदल सकती है. करीब 91 हजार बूथों में लगभा सही जगह समितियों का गठित करने का दावा है. जिलावार वॉर-रूम तैयार हो रहे हैं.

डेटा एनालिसिस, पिछली हार-जीत का मार्जिन, जातीय-सामाजिक समीकरण और महिला वोट—सबका अलग-अलग आकलन किया जा रहा है. बीजेपी का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि बंगाल में राजनीतिक संस्कृति बदलने का चुनाव होगा.

नेताओं को मिली अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी

चुनाव प्रबंधन में माहिर नेताओं को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है. राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल संगठन में गुटबाजी खत्म करने और मैसेजिंग कंट्रोल पर काम कर रहे हैं. भूपेंद्र यादव और बिप्लब देब जैसे नेता चुनावी गणित और उम्मीदवार चयन की रणनीति तैयार कर रहे हैं.

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दूसरे राज्यों से आए अनुभवी नेताओं को प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में मंडल और जिला स्तर पर तैनात किया गया है. इनकी जिम्मेदारी—कम मार्जिन से हारी सीटों पर खास रणनीति बनाना, अंदरूनी मतभेद सुलझाना, और बूथ स्तर पर मतदाता संपर्क बढ़ाना है. बीजेपी इस बार सीधे तौर पर व्यक्तिगत हमलों से बचने की रणनीति पर भी काम कर रही है. फोकस वंशवाद, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और रोजगार के मुद्दों पर रहेगा.

टीएमसी का कहना है कि बंगाल की जनता विकास और सामाजिक योजनाओं के साथ है. 2026 में भी जनता दीदी के नेतृत्व पर भरोसा करेगी.

महिला सुरक्षा को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी

बीजेपी महिला सुरक्षा को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है. आरजी कर और अन्य चर्चित घटनाओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा. रोजगार, उद्योगों की कमी और पलायन को भी नैरेटिव का हिस्सा बनाया जा रहा है.

साथ ही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची साफ होने से बीजेपी को फायदा मिलने की उम्मीद है. पार्टी का आरोप है कि पिछली बार डुप्लीकेट और फर्जी वोटिंग से नुकसान हुआ.

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160 सीटों का टारगेट सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है. बीजेपी अब विपक्ष की भूमिका से आगे बढ़कर सत्ता की दावेदार बनना चाहती है. हालाकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 6 से 7 फीसदी का वोट स्विंग आसान नहीं होता. इस बीच स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और बंगाल के माइग्रेंट वर्कर्स का मामला टीएमसी ने और बड़े स्तर पर उठाना शुरू कर दिया है.

क्या है 6.5 फीसदी गैप पाटने का गणित?

2026 का चुनाव बंगाल में सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि नैरेटिव और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा भी होगा. सवाल वही है, क्या मिशन 160 से बीजेपी टीएमसी के किले में सेंध लगा पाएगी? या फिर सत्ता की चाबी एक बार फिर ममता के हाथ में ही रहेगी!

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2021 में 77 सीटों तक पहुंचने वाली बीजेपी इस बार माइक्रो-मैनेजमेंट, बूथ स्ट्रक्चर और प्रवासी कार्यकर्ता मॉडल के जरिए बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है. महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, रोजगार और उद्योग—इन मुद्दों के सहारे पार्टी नैरेटिव बदलने की कोशिश में है.

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