जैसे ही भारत ने रूसी तेल से अपने आपको अलग किया. उसके बाद चीन ने एक बड़ा रिकॉर्ड कायम कर लिया. व्यापारियों और जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत द्वारा खरीद में भारी कटौती के बाद चीन का रूसी तेल आयात फरवरी में लगातार तीसरे महीने बढ़कर नए रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने वाला है. वॉर्टेक्सा एनालिटिक्स के शुरूआती आकलन के अनुसार, फरवरी में चीन को रूसी कच्चे तेल की सप्लाई 20 लाख बैरल प्रति दिन से ज्यादा होने का अनुमान है, जो जनवरी के अनुमानित 17 लाख बैरल प्रति दिन से अधिक है. केप्लर के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में आयात 20.83 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो जनवरी के 17.18 लाख बैरल प्रति दिन से अधिक है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन वॉर पर पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत की ओर से रूसी सप्लाई कम हो गई और 2 साल के लोअर लेवल पर आ गई. जिसके चलते चीन ने नवंबर से मॉस्को के समुद्री मार्ग से होने वाले तेल शिपमेंट के टॉप कस्टमर के रूप में भारत को पीछे छोड़ दिया है. केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर 1.159 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है. इससे रूसी तेल की कीमतें जनवरी/फरवरी में चीन को होने वाली सप्लाई के लिए बेंचमार्क आईसीई ब्रेंट की तुलना में 9 से 11 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई हैं.
यह ग्रेड यूरोपीय बंदरगाहों से लोड किया जाता है और आमतौर पर चीन की तुलना में कम दूरी की यात्रा के कारण भारत में आता है. यूराल्स के साथ-साथ सोकोल और वरंडे जैसे दूसरे तेलों ने चीन के निकट स्थित सुदूर पूर्व के कोज़मिनो बंदरगाह से निर्यात किए जाने वाले रूस के प्रमुख ईएसपीओ मिश्रण के रेगुलर शिपमेंट पर दबाव डाला है, जिससे ईरान से आने वाले क्रूड ऑयल के साथ कड़ा मुकाबला शुरू हो गया है.
घबराए हुए हैं ‘टीपॉट्स’
‘टीपॉट्स’ के नाम से जाने जाने वाले ये चीनी इंडीपेंडेंट रिफाइनर रूस, ईरान और वेनेजुएला से अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित तेल के दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं. टीपॉट्स के साथ नियमित रूप से व्यापार करने वाले एक सीनियर चीनी कारोबारी ने रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा कि रूसी तेल और ईरानी तेल के प्रोसेसिंग से मिलने वाली क्वालिटी को देखते हुए, रूसी सप्लाई अपेक्षाकृत अधिक प्रतिस्पर्धी हो गई है. व्यापारी ने आगे बताया कि मार्च की डिलीवरी के लिए ESPO ब्लेंड का प्राइस ICE ब्रेंट की तुलना में 8 से 9 डॉलर प्रति बैरल कम था, जबकि समान क्वालिटी वाले ग्रेड ईरानी लाइट का प्राइस ICE ब्रेंट से 10 से 11 डॉलर कम आंका गया था.
ईरानी तेल के मुकाबले में रूसी तेल भरोसेमंद
वोर्टेक्सा की चीन विश्लेषक एम्मा ली ने कहा कि जनवरी से ही इस अनिश्चितता के कारण कि अगर परमाणु समझौते के लिए बातचीत वाशिंगटन के वांछित परिणाम देने में विफल रहती है तो क्या अमेरिका ईरान पर सैन्य हमले करेगा, चीनी टीपॉट्स और व्यापारियों की खरीदारी में कमी आई है. ली ने कहा कि छोटे व्यवसायों के लिए, रूसी तेल अब अधिक भरोसेमंद लग रहा है क्योंकि लोग सैन्य टकराव की स्थिति में ईरानी तेल की सप्लाई को लेकर चिंतित हैं. ली ने आगे कहा कि रूस द्वारा तेल की बढ़ी हुई खरीद का एक हिस्सा शेडोंग के छोटे व्यवसायिक केंद्र से बाहर स्थित बड़े स्वतंत्र रिफाइनरों से आया है. वोर्टेक्सा का अनुमान है कि चीन को ईरानी तेल की सप्लाई – जिसे व्यापारी अक्सर अमेरिकी बैन से बचने के लिए मलेशियाई तेल बताकर बेचते हैं – इस महीने घटकर 1.03 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गई है, जो जनवरी के 1.25 मिलियन बैरल प्रति दिन से कम है.






