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फिजिकल गोल्ड-ETF या बॉन्ड कहां लगता है सबसे ज्यादा टैक्स, यहां समझें पूरा हिसाब

फिजिकल गोल्ड-ETF या बॉन्ड कहां लगता है सबसे ज्यादा टैक्स, यहां समझें पूरा हिसाब

सोने का बाजार इन दिनों बहुत उठा-पटक से गुजर रहा है. गोल्ड के दाम जो करीब 1 लाख 93 हजार को पा कर गए थे. वह अब 1 लाख 55 हजार प्रति 10 ग्राम के करीब आ गए हैं. ऐसे में अगर आप गोल्ड बेचने या खरीदने का सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है. आइए जानते हैं कि फिजिकल गोल्ड से लेकर ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने और बेचने पर कितना टैक्स लगता है?

फिजिकल सोना, ज्वेलरी, डिजिटल सोना इन सभी विकल्पों पर आपको 3% गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) देना होगा, जबकि अगर आप सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं तो मेकिंग चार्ज पर 5% GST लगता है. इसके अलावा गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF), गोल्ड म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की खरीद पर कोई GST नहीं लगता है. वहीं, विदेश से सोना मंगाने पर 6% कस्टम ड्यूटी लगती है. अगर आपको वसीयत के जरिए सोने की ज्वेलरी या किसी और रूप में सोना मिला है तो उस पर कोई विरासत टैक्स नहीं लगता है.

इसके अलावा कुछ करीबी रिश्तेदारों से गिफ्ट में मिले सोने पर कोई टैक्स नहीं लगता है, लेकिन अगर सोना ऐसे व्यक्ति से गिफ्ट में मिला है जो करीबी रिश्तेदार नहीं है और उसकी कीमत एक साल में 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो यह ‘अन्य आय’ के तहत टैक्स के दायरे में आता है.

सोने की बिक्री पर टैक्स

23 जुलाई 2024 के बाद, सोने पर शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन यानी कम समय या ज्यादा समय बाद बेचने से होने वाला फायदा की गणना की अवधि बदल गई है. साथ ही, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 54F के तहत सोने की बिक्री पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स नहीं देना पड़ता, अगर बिक्री से मिली पूरी रकम तय समय के अंदर घर खरीदने में लगा दी जाए.

फिजिकल सोना, ज्वेलरी, डिजिटल सोना- अगर सोना 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाता है, तो लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% टैक्स लगेगा. अगर 24 महीने से कम समय में बेचते हैं, तो शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन आपकी कुल आय में जोड़कर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा.

गोल्ड ETF- अगर ETF को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाए, तो लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% टैक्स लगेगा. अगर 12 महीने से पहले बेच दिया जाए, तो होने वाला लाभ आपकी आय में जोड़कर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा.

गोल्ड म्यूचुअल फंड- वहीं, अगर म्यूचुअल फंड को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचा जाता है, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और 12.5% टैक्स लगेगा. अगर 24 महीने से पहले बेचा जाता है, तो शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर आपकी आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड- बजट 2026 से पहले, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी पर या उससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक के पास रिडीम करने पर टैक्स नहीं लगता था, चाहे इन्हें प्राइमरी इश्यू या सेकेंडरी मार्केट से खरीदा गया हो. अब केवल वही बॉन्ड टैक्स से मुक्त हैं जो सरकार से सीधे खरीदे गए हों और मैच्योरिटी तक लगातार रखे गए हों. अगर सेकेंडरी मार्केट से खरीदा या बीच में बेच दिया जाता है, तो होल्डिंग पीरियड के आधार पर शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा.

विरासत में मिला सोना- भारत में विरासत टैक्स नहीं है, लेकिन जब आप उस सोने को बेचते हैं तो कैपिटल गेन टैक्स देना होगा. खरीद की कीमत और रखने की अवधि वही मानी जाएगी जब असली मालिक ने इसे खरीदा था. अगर कुल होल्डिंग पीरियड 24 महीने से ज्यादा है, तो बिना इंडेक्सेशन के 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. अगर 24 महीने से कम है, तो शॉर्ट-टर्म गेन पर आपकी आय के हिसाब से टैक्स लगेगा.

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