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बेस मेटल और खाने के सामान की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई, 9 महीनों के हाई पर WPI

बेस मेटल और खाने के सामान की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई, 9 महीनों के हाई पर WPI
बेस मेटल और खाने के सामान की कीमतों ने बढ़ाई महंगाई, 9 महीनों के हाई पर WPI

थोक महंगाई में जनवरी के महीने में इजाफा देखने को मिला है.

खुदरा महंगाई के बाद अब देश को होलसेल महंगाई के मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है. देश के होलसेल बाजारों में महंगाई की दर 9 महीने के पीक पर पहुंच गई है. सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) जनवरी में बढ़कर 1.81 फीसदी हो गई, जो दिसंबर में 0.83 फीसदी थी. जिसकी वजह से थोक महंगाई 9 महीनों के उच्चतम स्तर पर है. जनवरी 2026 में महंगाई में इजाफे का प्रमुख कारण बेस मेटल्स, अन्य निर्मित उत्पादों, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य वस्तुओं और वस्त्रों के निर्माण में बढ़ी कीमतों के कारण रही.

खास बात तो ये है कि फूड इंफ्लेशन में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. दिसंबर में 0.00 फीसदी पर स्थिर रहने के बाद जनवरी में खाद्य महंगाई बढ़कर 1.41 फीसदी हो गई. अर्थशास्त्रियों के रॉयटर्स सर्वे में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई, जिसका अभी तक रीअसेसमेंट नहीं किया गया है, के दिसंबर में 0.83 फीसदी से बढ़कर 1.25 फीसदी वार्षिक होने का अनुमान लगाया गया था.

खुदरा महंगाई में भी इजाफा

2024 को आधार वर्ष मानते हुए संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सीरीज के पहले आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों और कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों के कारण जनवरी 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 2.75% हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई 2.73 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 2.77 फीसदी देखने को मिली थी. जनवरी में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई बढ़कर 2.21 फीसदी हो गई, जो दिसंबर में 0.21 फीसदी थी. ईंधन और बिजली की महंगाई जनवरी में 4.01 फीसदी पर नेगेटिव देखने को मिली, जबकि दिसंबर में इसमें 2.31 फीसदी की गिरावट आई थी.

रसोई के सामान में इजाफा

जनवरी में सब्जियों की कीमतों में उछाल आया और दिसंबर में 3.50 फीसदी की गिरावट के मुकाबले इनमें सालाना आधार पर 6.78 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. प्याज की कीमतों में गिरावट जारी रही, लेकिन गिरावट की दर में काफी कमी आई और जनवरी में यह घटकर 33.42 फीसदी रह गई, जबकि दिसंबर में यह 54.40 फीसदी थी. आलू की कीमतों में गिरावट जारी रही और जनवरी में इनमें 38.84 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो दिसंबर में दर्ज की गई 38.21 फीसदी की सालाना गिरावट से थोड़ी अधिक है.

अनाज की कीमतों में लगातार चौथे महीने गिरावट जारी रही और जनवरी में इनमें सालाना आधार पर 1.41 फीसदी की गिरावट आई, जबकि दिसंबर में यह गिरावट 1.18 फीसदी थी. वहीं, दालों की कीमतों में जनवरी में 11.05 फीसदी की गिरावट आई, जो दिसंबर में दर्ज की गई 13.88 फीसदी की गिरावट से कम है. दूध की कीमतों में जनवरी में सालाना आधार पर 2.51 फीसदी की वृद्धि हुई, जो दिसंबर में दर्ज की गई 3.23 फीसदी की वृद्धि से कम है.

आरबीआई का महंगाई पर रुख

इससे पहले, भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने महंगाई पूर्वानुमान को संशोधित करते हुए ऊपर की ओर रुख किया, जो इस बात का संकेत है कि पहले यह अनुमान लगाया गया था कि कीमतों पर दबाव धीरे-धीरे कम होगा. केंद्रीय बैंक अब वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंज्यूमर प्राइस इंफ्लेशन 4 फीसदी और दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी रहने का अनुमान लगा रहा है, जो उसके पिछले अनुमानों से मामूली रूप से अधिक है.

वित्त वर्ष 2026 के लिए, एमपीसी ने अपने पूर्वानुमानों को भी संशोधित किया है. अब पूरे वर्ष के लिए मुख्य मुद्रास्फीति 2.1 फीसदी और चौथी तिमाही के लिए 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है. दिसंबर में अपनी समीक्षा में, समिति ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए महंगाई 2.9 फीसदी, पहली तिमाही के लिए 3.9 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था. दिसंबर में हुई बैठक के समय, एमपीसी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने महंगाई अनुमान को अक्टूबर में अनुमानित 2.6 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया था, जो महंगाई में कमी के मजबूत रुझान को दर्शाता है.

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