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मोदी सरकार की इस योजना से अब हर कोई होगा मालामाल! अमिताभ कांत बोले- यहीं से बदलेगी देश की किस्मत

मोदी सरकार की इस योजना से अब हर कोई होगा मालामाल! अमिताभ कांत बोले- यहीं से बदलेगी देश की किस्मत
मोदी सरकार की इस योजना से अब हर कोई होगा मालामाल! अमिताभ कांत बोले- यहीं से बदलेगी देश की किस्मत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

अगर आप ट्रैफिक जाम, पानी की समस्या या कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझते हुए किसी बड़े शहर में रहते हैं, तो केंद्र सरकार का नया फैसला आपके लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है. केंद्रीय कैबिनेट ने शहरों की सूरत बदलने के लिए ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (Urban Challenge Fund) को मंजूरी दे दी है. इस फंड के जरिए 1 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की व्यवस्था की गई है, जो देश के शहरी विकास को एक नई दिशा देगी.

आखिर क्या है सरकार की यह नई योजना?

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब शहरों का विकास पुराने ढर्रे पर नहीं होगा. इस नई पहल के तहत 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों, राज्यों की राजधानियों और प्रमुख औद्योगिक शहरों को शामिल किया गया है. योजना का गणित बहुत ही दिलचस्प और परिणाम देने वाला है. केंद्र सरकार किसी प्रोजेक्ट की लागत का 25% हिस्सा खुद वहन करेगी, लेकिन इसके लिए एक बड़ी शर्त रखी गई है. शर्त यह है कि प्रोजेक्ट के लिए कम से कम 50% पैसा बाजार से जुटाना होगा.

सरकार का यह कदम केवल सरकारी खजाने से पैसा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद शहरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस पहल से अगले पांच सालों में शहरी क्षेत्रों में करीब 4 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश आएगा. यानी सरकार की थोड़ी मदद से बाजार का बड़ा पैसा शहरों के विकास में लगेगा.

शहर बनेंगे देश की तरक्की का इंजन

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने इस योजना को देश के विकास का सबसे बड़ा इंजन करार दिया है. उनका कहना है कि भारत में शहरीकरण को लेकर जो झिझक पहले थी, अब वह खत्म हो रही है. उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक महत्वपूर्ण बात लिखी कि आने वाले दशकों में शहरीकरण ही भारत के विकास का सबसे बड़ा एजेंट होगा.

आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत का अर्बन सिस्टम दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है. पूरी दुनिया की शहरी आबादी का 11 फीसदी हिस्सा अकेले भारतीय शहरों में रहता है. यह संख्या अमेरिका, जर्मनी, जापान और यूके की कुल शहरी आबादी से भी ज्यादा है. अमिताभ कांत का मानना है कि यह फंड शहरों में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगा, जिससे न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा बल्कि लोगों की जीवनशैली भी बेहतर होगी.

अब परफॉर्मेंस के आधार पर मिलेगा पैसा

अब तक शहरों को सरकारी अनुदान (Grants) के भरोसे रहना पड़ता था, लेकिन अब नजरिया बदल गया है. सरकार के बयान के मुताबिक, यह योजना ‘ग्रांट-आधारित’ फंडिंग से हटकर ‘मार्केट-लिंक्ड’ और ‘परिणाम-उन्मुख’ (Result-oriented) मॉडल की तरफ बढ़ने का संकेत है. यानी, जो शहर सुधार करेंगे, निजी क्षेत्र को साथ लाएंगे और नागरिकों की सुविधाओं पर ध्यान देंगे, उन्हें ही इसका फायदा मिलेगा.

इस फंड का मुख्य उद्देश्य शहरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है. शहर अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि ‘ग्रोथ सेंटर’ यानी आर्थिक वृद्धि के केंद्र बनेंगे. यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से शुरू होकर 2030-31 तक प्रभावी रहेगी, जिसे जरूरत पड़ने पर 2033-34 तक बढ़ाया भी जा सकता है.

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