
भू आधार कार्ड
अक्सर देखा जाता है कि एक इंच जमीन के लिए भी सालों-साल कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं. कभी नक्शे में गड़बड़ी तो कभी असली मालिक की पहचान का संकट, जमीन से जुड़े विवाद आम आदमी की जमा-पूंजी और सुकून दोनों छीन लेते हैं. लेकिन अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा रहा है. दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत अब इंसानों की तरह ही हर जमीन का अपना एक आधार कार्ड होगा. इसे तकनीकी भाषा में ULPIN यानी ‘विशिष्ट भूखंड पहचान संख्या’ नाम दिया गया है. हाल ही में महाराष्ट्र में ये ‘भू-आधार’ को लाया गया है.
14 अंकों का वो नंबर, जो बदल देगा सबकुछ
इस नई व्यवस्था में हर एक प्लॉट या खेत को 14 अंकों का एक यूनिक नंबर दिया जाएगा. इसे ही ‘भू-आधार’ कहा जा रहा है. जैसे आपका आधार नंबर डालते ही आपकी पहचान सामने आ जाती है, ठीक वैसे ही इस 14 अंकों के नंबर को सिस्टम में डालते ही जमीन का पूरा इतिहास खुल जाएगा. उस जमीन का क्षेत्रफल कितना है, उसकी सीमाएं कहां तक हैं, उसका असली मालिक कौन है और उस पर अब तक कौन-कौन सी फसलें उगाई गई हैं, यह सारी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी.
आम आदमी और किसानों को सीधा फायदा कैसे?
इस लैंड आधार सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा उन किसानों और आम लोगों को होगा जो अपनी ही जमीन का हक साबित करने के लिए दफ्तरों के धक्के खाते हैं.
- विवादों का अंत: जब सैटेलाइट और डिजिटल मैपिंग से जमीन की सीमाएं तय हो जाएंगी, तो पड़ोसी के साथ मेड़ को लेकर होने वाले झगड़े खत्म हो जाएंगे.
- लोन और मुआवजे में आसानी: अभी बैंकों से लोन लेने या फसल खराब होने पर मुआवजा पाने के लिए कई दस्तावेज देने पड़ते हैं. भू-आधार होने पर बैंक तुरंत वेरीफाई कर सकेंगे कि जमीन किसके नाम है, जिससे लोन प्रक्रिया बहुत तेज हो जाएगी.
- धोखाधड़ी पर लगाम: जमीन खरीदते समय अक्सर लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं. इस यूनिक नंबर के जरिए खरीदार पहले ही चेक कर सकेगा कि जमीन का असली मालिक कौन है और उस पर कोई पुराना विवाद तो नहीं चल रहा.






