
सीमा सड़क संगठन.
सीमा सड़क संगठन (BRO) के प्रोजेक्ट हीरक (Project Hirak) ने टनकपुर, उत्तराखंड में अपना 46वां स्थापना दिवस मनाया. यह प्रोजेक्ट पिछले चार दशकों से देश के सबसे संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में सड़क और पुल निर्माण के जरिए रणनीतिक कनेक्टिविटी मजबूत कर रहा है.
1980 से शुरू हुआ सफर
प्रोजेक्ट हीरक की स्थापना 15 फरवरी 1980 को हुई थी. शुरुआत में इसे धनबाद के कोयला क्षेत्रों में लिंक रोड बनाने के लिए विशेष कार्यबल (STF) के रूप में बनाया गया था. बाद में इसका मुख्यालय नागपुर और फिर 2011 में उत्तराखंड के चंपावत स्थानांतरित हुआ. 15 फरवरी 2022 को इसे पूर्ण परियोजना का दर्जा दिया गया.
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025
प्रोजेक्ट ‘हीरक’ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2025 के दौरान एक बड़ा मुकाम हासिल किया. पहली बार श्रद्धालु वाहन से लिपुलेख दर्रे से सिर्फ 500 मीटर पहले तक पहुंच सके. भारी बारिश और भूस्खलन के बावजूद BRO ने सड़क की लगातार मरम्मत और अपग्रेडेशन कर यात्रा को सुरक्षित बनाया.
सीमा क्षेत्रों में मजबूत सड़क नेटवर्क
- रणनीतिक रूप से अहम तवाघाट-गुंजी-लिपुलेख मार्ग को नेशनल हाईवे डबल लेन मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है.
- दिसंबर 2024 में गुंजी-कुट्टी-जोलिंगकोंग सड़क पूरी की गई, जिससे व्यास घाटी के सीमा गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिली.
- इससे आदि कैलाश धाम तक पहुंच आसान हुई और सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल क्षमता भी बढ़ी.
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी काम
प्रोजेक्ट हीरक छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में भी चुनौतीपूर्ण हालात में काम कर रहा है.
- 129 किलोमीटर सड़क निर्माण
- 13 से अधिक पुलों का निर्माण
- बीजापुर, सुकमा, कोंटा और नारायणपुर क्षेत्रों में काम जारी
नदियों और नालों पर पुल बनाकर इन इलाकों में विकास और सुरक्षा दोनों को मजबूती दी जा रही है.
राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका
अपने 46वें स्थापना दिवस पर प्रोजेक्ट हीरक ने सीमा और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्र निर्माण, सुरक्षा तैयारियों और विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यह प्रोजेक्ट देश की रणनीतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत कर दूरदराज के इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है.






