
महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष का कांग्रेस पर हमला.
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के टीपू सुल्तान पर दिए गए बयान के बाद राजनीति गरमाई हुई है. सीएम देवेंद्र फडणवीस के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हान ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस को घेरा है.
रविन्द्र ने चव्हान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान की कड़ी निंदा की है. उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखा, ‘काशी की कला जाती, मथुरा भी मस्जिद होती, शिवाजी न होते, तो सुन्नत सबकी होती.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘अठारह पगड़ी जाति-धर्मों को साथ लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना रयत के सुख के लिए और देव-देश-धर्म की रक्षा के लिए की थी. ऐसे समय में केवल अपना संस्थान बचाने के लिए अंग्रेजों से लड़ने वाला, मंदिर तोड़ने वाला और हिंदुओं पर अत्याचार करने वाला टीपू सुल्तान, शिवाजी महाराज के समकक्ष कैसे हो सकता है?’
ऐसे विचार केवल कांग्रेस की ‘मुगलिया मानसिकता’
उन्होंने आगे लिखा, ‘ऐसे विचार केवल कांग्रेस की ‘मुगलिया मानसिकता’ से ही आ सकते हैं. इसी मानसिकता का परिचय देते हुए कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने ‘कांग्रेसनिष्ठा’ तो निभाई, लेकिन महाराष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा को ठेस पहुंचाई है. सपकाल जी, यह मत भूलिए कि आपका जन्म छत्रपतियों की भूमि महाराष्ट्र में हुआ है. इसी ‘मुगलिया मानसिकता’ के कारण महाराष्ट्र ने समय-समय पर कांग्रेस को नकारा है.’
काशी की कला जाती, मथुराभी मस्जिद होती,
शिवाजी ना होते, तो सुन्नत सबकी होती…अठरा पगड जातीधर्मांना सोबत घेऊन शिवरायांनी स्वराज्य उभारलं ते रयतेच्या सुखासाठी आणि देव-देश-धर्माच्या रक्षणासाठी.
अशावेळी केवळ स्वतःचे संस्थान वाचवण्यासाठी ब्रिटीशांशी लढणारा, मंदिरं फोडणारा आणि
— Ravindra Chavan (@RaviDadaChavan) February 14, 2026
महाराष्ट्र की हिंदवी अस्मिता को आहत न करें. अन्यथाजिस मिट्टी ने औरंगजेब की कब्र खोदी, वही मिट्टी कांग्रेस की इस मुगलिया मानसिकता को भी चूर-चूर करने की ताकत रखती है.
टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी के समकक्ष बताया
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने बुलढाना में एक कार्यक्रम के दौरान टीपू सुल्तान की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज का शौर्य जिस तरह का है और स्वराज्य नाम का उन्होंने जो एक विचार दिया है. ठीक उसी के पदचिन्हों पर चलते हुए, उनके काफी समय बाद, उनका आदर्श लेकर टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का ऐलान किया था. उस अर्थ में, टीपू सुल्तान एक शौर्य दिखाने वाले योद्धा होकर गए. इसलिए शौर्य के प्रतीक के रूप में हम टीपू सुल्तान को शिवाजी महाराज के समकक्ष (समान) मानते हैं.






