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क्या होता है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, दिल पर कैसे करता है असर?

क्या होता है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, दिल पर कैसे करता है असर?
क्या होता है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, दिल पर कैसे करता है असर?

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोमImage Credit source: Getty Images

दिल टूटना केवल भावनात्मक दर्द नहीं होता, बल्कि यह असली स्वास्थ्य समस्या भी बन सकती है, जिसे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम कहा जाता है. यह स्थिति अक्सर अचानक मानसिक या शारीरिक तनाव के बाद होती है. ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में दिल की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती हैं और दिल सामान्य तरीके से खून पंप नहीं कर पाता. इसे अक्सर हार्ट अटैक जैसी स्थिति के साथ भ्रमित किया जा सकता है.

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में कई बार मरीजों को सीने में तेज दर्द, सांस लेने में कठिनाई, धड़कन तेज होना, कमजोरी और चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं. कुछ लोगों को पसीना आना, मितली या उल्टी जैसी समस्या भी हो सकती है. हालांकि, सही समय पर इलाज मिलने पर दिल सामान्य स्थिति में लौट सकता है. इसलिए मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है.

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के क्या कारण हैं?

राजीव गांधी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, जिसे टैकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी भी कहते हैं, दिल की मांसपेशियों की अस्थायी कमजोरी है. इसमें हार्ट की पंपिंग क्षमता असामान्य हो जाती है और दिल ठीक से खून नहीं पंप कर पाता. यह अक्सर अचानक मानसिक या भावनात्मक झटके के बाद होता है, जैसे किसी प्रियजन की मौत, प्यार में धोखा, नौकरी खोना या कोई बड़ा जीवन बदलाव.

हॉर्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ दवाओं का असर भी इसे ट्रिगर कर सकता है. खासकर महिलाओं में, 50 साल के बाद, यह स्थिति ज्यादा देखी जाती है. शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर बढ़ने से दिल की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है. इसके कारण दिल असामान्य रूप से काम करने लगता है और हार्ट रेट बढ़ सकता है. हालांकि, यह स्थिति अस्थायी होती है और समय पर इलाज मिलने पर दिल सामान्य रूप से काम करने लगता है.

कैसे करें बचाव

तनाव और भावनात्मक झटकों से बचाव करना सबसे जरूरी है. नियमित योग, मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज दिल और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद हैं. संतुलित डाइट और पर्याप्त नींद भी हार्ट हेल्थ बनाए रखने में मदद करते हैं.

मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर काउंसलर या डॉक्टर से मदद लें. अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव, जैसे गहरी सांस लेना और आराम करना, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के जोखिम को कम कर सकते हैं.

डॉक्टर से कब मिलें

अगर आपको ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. सीने में तेज दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अचानक धड़कन तेज होना, चक्कर आना या कमजोरी जैसी समस्याएं नजरअंदाज न करें. अगर ये लक्षण अचानक या अत्यधिक बढ़ जाएं, तो इसे हार्ट अटैक की तरह गंभीर माना जाता है. डॉक्टर आपके हार्ट का टेस्ट करेंगे और सही निदान बताएंगे.

लक्षण हल्के हों लेकिन बार-बार दिखें, तब भी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. समय पर मेडिकल मदद लेने से दिल को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है और आपकी सेहत जल्दी सुधार सकती है. किसी भी तरह का संदेह या असामान्य लक्षण महसूस होने पर देर न करें और तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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