
UGC बन जाएगा इतिहास
UGC समानता नियमों को लेकर देश में विवाद थमा नहीं है. बेशक सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों अपने एक अहम फैसले में यूजीसी समानता नियम 2026 पर रोक लगा दी थी. इसके साथ ही इन नियमों में सुधार के लिए नई कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे. तब तक यूजीसी समानता नियम 2012 को लागू रखने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बाद देश के कई हिस्सों में यूजीसी समानता नियम 2026 के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. संसद के बजट सत्र के दौरान भी यूजीसी के समानता नियमों को लेकर प्रदर्शन के मामले सामने आए हैं. इस बीच अधिकांश लोगों यूजीसी पर स्टेटस जानना चाहते हैं, जिसके तहत यूजीसी को खत्म करने वाले बिल की स्थिति के बारे में लाेग जानना चाहते हैं.
आइए, जानते हैं कि यूजीसी को खत्म करने वाला मामला क्या है? जानेंगे कि यूजीसी को खत्म करने के लिए लाया गया विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल संसद में कहां फंसा हुआ है? यानी की संसद में उसका स्टेटस क्या है?
शीतकालीन सत्र 2025 में लाया गया था विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल
केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल को सदन के पटल पर रखा था. इस बिल में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीईआरटी की जगह एक शीर्ष कानूनी आयोग बनाने का प्रावधान है. इस आयोग के अधीन तीन अलग-अलग परिषद होंगी. ये आयोग शिक्षा से जुड़ी नीतियों के निर्धारण और समन्वय का काम करेगा. संसद के शीतकालीन सत्र में इस बिल को लोकसभा में रखा गया था. विपक्ष की चिंताओं के बाद बिल को विचार के लिए संसद कीसंयुक्त संसदीय समिति यानी ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेजा गया है.
JPC का अध्यक्ष और सदस्य कौन?
UGC, AICTE, NCERT की जगह लाए जा रहे विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान को समीक्षा के लिए JPC के पास भेजा गया है. JPC की अध्यक्षता BJP MP डी पुरंदेश्वरी हैं. तो वहीं इसमें कुल 31 सदस्य हैं, जो दोनों सदनों के सदस्य हैं. इसमें दिग्विजय सिंह (कांग्रेस), सागरिका घोष (TMC), सस्मित पात्रा (BJD), संजय कुमार झा (JD-U), राम गोपाल यादव (SP), तेजस्वी सूर्या (BJP), अनुराग सिंह ठाकुर (BJP), वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस), सौगत रे (TMC), और टीआर बालू (DMK) प्रमुख हैं.
JPC बिल पर क्या करेगी
BJP MP डी पुरंदेश्वरी की अध्यक्षता वाली JPC विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल की जांच करेगी. JPC जांच के बाद अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेंगी, लेकिन उससे पहले कानून के नियमों की समीक्षा करेगी. JPC से उम्मीद है कि वह अपनी सिफारिशों को फाइनल करने से पहले राज्य सरकारों, एकेडमिक बॉडीज़ और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगेगी. अभी इस बिल को लेकर JPC ने अपनी कार्यवाही शुरू नहीं की है.
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