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India-US Trade Deal: पूरे एशिया में बज गया भारत का डंका! चीन-वियतनाम सब पीछे, टैक्स अब सबसे कम

India-US Trade Deal: पूरे एशिया में बज गया भारत का डंका! चीन-वियतनाम सब पीछे, टैक्स अब सबसे कम
India-US Trade Deal: पूरे एशिया में बज गया भारत का डंका! चीन-वियतनाम सब पीछे, टैक्स अब सबसे कम

भारत अमेरिका ट्रेड डील

India-US Trade Deal: भारत ने वैश्विक व्यापार के कुरुक्षेत्र में एक ऐसी जीत हासिल की है, जिसकी गूंज वियतनाम से लेकर बीजिंग तक सुनाई दे रही है. एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने एशियाई देशों के बीच सबसे कम टैरिफ (आयात शुल्क) वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह पक्की कर ली है. अमेरिका के साथ हुए नए समझौते के बाद भारत का टैरिफ रेट घटकर महज 18% रह गया है. इस समझौते ने भारत को वियतनाम जैसे देशों से भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना दिया है, जो अब तक अमेरिका का सबसे लाडला ट्रेडिंग पार्टनर माना जाता था.

कैसे भारत ने चीन को पछाड़ा

व्यापार की दुनिया में एक-एक प्रतिशत का उतार-चढ़ाव करोड़ों डॉलर का खेल बदल देता है. एसबीआई की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं. जहां बातचीत के बाद भारत पर लगने वाला टैरिफ 18% हो गया है, वहीं चीन के लिए यह दर अभी भी 37% के भारी-भरकम स्तर पर है. इसका सीधा मतलब है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान अब चीनी सामान के मुकाबले कहीं ज्यादा सस्ता और आकर्षक होगा.

यही नहीं, भारत ने इस मामले में वियतनाम (20%), थाईलैंड (19%) और ताइवान (20%) जैसे प्रमुख निर्यातक देशों को भी पीछे छोड़ दिया है. दक्षिण कोरिया और जापान (15%) ही अब भारत से थोड़ा बेहतर स्थिति में हैं. यह बदलाव भारतीय टेक्सटाइल, लेदर और फुटवियर उद्योग के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, क्योंकि अब उनके उत्पाद अमेरिकी बाजार में अन्य एशियाई देशों के मुकाबले ज्यादा मजबूती से टिक पाएंगे.

अमेरिका के साथ प्रमुख देशों का व्यापार

देशबातचीत के बाद टैरिफ (Tariff post negotiation)कुल अमेरिकी निर्यात में प्राप्तकर्ता देश का हिस्सा (CY25 नवंबर तक)कुल अमेरिकी आयात में भागीदार देश का हिस्सा (CY25 नवंबर तक)देश के साथ अमेरिका का व्यापार संतुलन ($ बिलियन CY25 नवंबर तक)
बांग्लादेश190.10.3-7
कंबोडिया190.00.4-14
चीन374.99.2-189
भारत182.13.0-53
इंडोनेशिया190.51.0-22
जापान153.84.3-58
मलेशिया191.31.7-28
फिलीपींस190.40.5-8
दक्षिण कोरिया153.13.6-50
ताइवान202.55.6-127
थाईलैंड190.92.6-64
वियतनाम200.75.6-161
लाओस400.00.1-2
ब्राजील502.51.213
कनाडा5015.211.2-47
म्यांमार400.00.0-1
दक्षिण अफ्रीका300.30.5-10
पाकिस्तान190.10.2-2
यूके (UK)104.41.929
यूरोपीय संघ (EU)1519.018.7-205
स्विट्जरलैंड153.43.2-34
स्रोत: यूएस इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन, रीड स्मिथ टैरिफ ट्रैकर 2, एसबीआई रिसर्च

अमेरिका से क्या मिलेगा और हमें क्या चुकाना होगा?

यह समझौता एक तरफा नहीं है, बल्कि ‘रेसिप्रोकल’ यानी पारस्परिक है. संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका भारतीय सामानों पर 18% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा. इसमें कपड़े, चमड़े का सामान, जूते, प्लास्टिक, रबर और कुछ मशीनरी शामिल हैं. लेकिन अच्छी खबर यह है कि अमेरिका भारत के कुछ विमानों और विमान के पुर्जों पर से टैरिफ पूरी तरह हटा देगा. साथ ही, ऑटोमोटिव पार्ट्स (गाड़ियों के कलपुर्जे) के लिए भारत को विशेष वरीयता दी जाएगी.

बदले में, भारत ने भी बड़ा दिल दिखाया है. भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपके बाजार में अमेरिका से आने वाले सूखे मेवे (Tree nuts), ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, और वाइन जैसी चीजें सस्ती हो सकती हैं. इसके अलावा, भारत ने ‘ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स’ और जानवरों के चारे के लिए ‘रेड सोरघम’ जैसे उत्पादों पर भी शुल्क घटाने का वादा किया है.

500 बिलियन डॉलर का महा-सौदा

इस समझौते का सबसे भारी-भरकम पहलू वह वादा है, जिसमें भारत ने अगले 5 सालों में अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर (अरबों रुपये) की खरीदारी करने की मंशा जताई है. इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं और कोकिंग कोल शामिल हैं. यह सौदा दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा.

इसके साथ ही, डिजिटल दुनिया के लिए भी नियम बदल रहे हैं. भारत अपने यहां लगने वाले ‘डिजिटल सर्विसेज टैक्स’ को हटाने पर सहमत हो गया है. दोनों देश अब डिजिटल व्यापार के लिए ऐसे नियम बनाएंगे जो भेदभावपूर्ण न हों. इसका असर यह होगा कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जिससे आईटी और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी.

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