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देश की दिग्गज आईटी कंपनी TCS का हुआ बुरा हाल, 52 हफ्ते के लो पर आया शेयर, मार्केट कैप 10 लाख करोड़ के नीचे

देश की दिग्गज आईटी कंपनी TCS का हुआ बुरा हाल, 52 हफ्ते के लो पर आया शेयर, मार्केट कैप 10 लाख करोड़ के नीचे
देश की दिग्गज आईटी कंपनी TCS का हुआ बुरा हाल, 52 हफ्ते के लो पर आया शेयर, मार्केट कैप 10 लाख करोड़ के नीचे

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज

आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शेयर गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को इंट्रा-डे कारोबार में 5% से ज्यादा टूटकर 52 हफ्ते के निचले स्तर ₹2,752.75 पर पहुंच गया. टेक शेयरों में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर चल रही वैश्विक बिकवाली का असर TCS पर भी दिखा. दिसंबर 2020 के बाद यह पहली बार है जब कंपनी का मार्केट कैप ₹10 लाख करोड़ से नीचे फिसल गया. खबर लिखे जाने तक TCS का बाजार पूंजीकरण करीब ₹9.97 लाख करोड़ था.

इसी दिन निजी बैंक ICICI बैंक ने TCS को पीछे छोड़ते हुए मार्केट कैप के लिहाज से भारत की पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी का स्थान हासिल कर लिया. एक दिन पहले SBI भी TCS से आगे निकलकर चौथे स्थान पर पहुंच गया था. ICICI बैंक का मार्केट कैप ₹10.09 लाख करोड़ रहा. वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज ₹19.7 लाख करोड़ के साथ देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है, उसके बाद HDFC बैंक और भारती एयरटेल का स्थान है.

गिरावट की वजह क्या रही?

अमेरिका में जनवरी महीने की जॉब रिपोर्ट उम्मीद से बेहतर रही और बेरोजगारी दर घटकर 4.3% पर आ गई. इससे संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में जल्द कटौती नहीं करेगा. मजबूत आंकड़ों से डॉलर मजबूत हुआ और निवेशकों की दर कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ीं.

वॉल स्ट्रीट पर भी टेक शेयरों में गिरावट रही. माइक्रोसॉफ्ट और अल्फाबेट जैसे दिग्गज शेयर टूटे, जिससे आईटी सेक्टर पर दबाव बढ़ा. भारत में निफ्टी आईटी इंडेक्स 4% से ज्यादा गिरा और इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, कोफोर्ज व पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे शेयर भी 4% से ज्यादा लुढ़क गए.

क्या अब आईटी शेयर खरीदने चाहिए?

स्टॉक्सकार्ट के सीईओ प्रणय अग्रवाल का मानना है कि आईटी शेयरों में हालिया गिरावट ज्यादा भावनात्मक है, बुनियादी कमजोरी नहीं. उनके अनुसार, एआई से पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल को चुनौती जरूर मिलेगी, लेकिन इससे नए अवसर भी बनेंगे जैसे एआई इम्प्लीमेंटेशन, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन.

उनका कहना है कि भारतीय आईटी सेक्टर कमजोर नहीं, बल्कि समय के साथ खुद को बदलने की ओर बढ़ रहा है. इंडस्ट्री की ग्रोथ 67% रहने का अनुमान है, जिसे डिजिटल और स्पेशलाइज्ड स्किल्स की बढ़ती मांग सपोर्ट दे रही है.

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