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शेयर बाजार में भूचाल, निवेशकों के 3 लाख करोड़ स्वाहा! इन वजहों से धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी

शेयर बाजार में भूचाल, निवेशकों के 3 लाख करोड़ स्वाहा! इन वजहों से धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी
शेयर बाजार में भूचाल, निवेशकों के 3 लाख करोड़ स्वाहा! इन वजहों से धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी

शेयर बाजार धड़ामImage Credit source: ai generated

why market fall today: भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त कोहराम देखने को मिला. जो बाजार इस हफ्ते की शुरुआत में नई ऊंचाइयों को छूने की कोशिश कर रहा था, वह आज औंधे मुंह गिर पड़ा. सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्रों के करीब आते-आते दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि निवेशकों की करीब 3.06 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति देखते ही देखते स्वाहा हो गई. बीएसई का कुल मार्केट कैप घटकर 471.93 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है.

सेंसेक्स ने 700 अंकों से ज्यादा का गोता लगाया और 83,516 के निचले स्तर को छू लिया. वहीं, निफ्टी 50 भी अपने अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ते हुए 25,800 के नीचे फिसल गया. इस गिरावट ने आम निवेशकों के पोर्टफोलियो को लाल रंग में रंग दिया है. सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ जिसने बाजार का मूड पूरी तरह खराब कर दिया? आइए, विस्तार से समझते हैं आज की इस भारी गिरावट के पीछे के बड़े कारण.

IT सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का डर

आज की गिरावट का सबसे बड़ा विलेन आईटी सेक्टर साबित हुआ. निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 4% की भारी गिरावट दर्ज की गई. Infosys, Wipro, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयरों में 4 से 5 फीसदी तक की टूट देखने को मिली. अकेले इस सेक्टर की गिरावट ने निवेशकों के 1.3 लाख करोड़ रुपये डुबो दिए.

इसके पीछे अमेरिका की एआई स्टार्टअप कंपनी ‘एंथ्रोपिक’ (Anthropic) है. इस कंपनी ने हाल ही में कानूनी कामों के लिए एक नया एआई टूल लॉन्च किया है. यह टूल कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू और लीगल ब्रीफिंग जैसे काम ऑटोमैटिक कर सकता है. बाजार को डर है कि अगर एआई ने ये काम संभाल लिए, तो भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू पर भारी असर पड़ेगा. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के डॉ. वी.के. विजयकुमार का कहना है कि एंथ्रोपिक के इस झटके से टेक स्टॉक्स का जल्द उबरना मुश्किल लग रहा है.

2. अमेरिका से आई खबर ने तोड़ी उम्मीदें

बाजार की नजरें अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर टिकी थीं, लेकिन वहां से आए आंकड़ों ने निवेशकों को निराश कर दिया. अमेरिका में जनवरी महीने की ‘Jobs Data’ उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत आई है. आम तौर पर अच्छी इकोनॉमी खुशी की बात होती है, लेकिन शेयर बाजार के लिए इसका मतलब अलग है.

मजबूत आंकड़ों का अर्थ है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) अब ब्याज दरों में कटौती करने की जल्दी नहीं दिखाएगा. निवेशक उम्मीद लगाए बैठे थे कि जून में ब्याज दरें कम होंगी, लेकिन अब सीएमई ग्रुप के डेटा के मुताबिक, दरें स्थिर रहने की संभावना 24.8% से बढ़कर 41% हो गई है. ब्याज दरें ऊंची रहने का मतलब है कि विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा सकते हैं.

3. HUL के नतीजों ने बढ़ाया दर्द

एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) के शेयरों में आई 5% की गिरावट ने आग में घी का काम किया. कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए, जिसमें उनका शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 30% गिरकर 2,188 करोड़ रुपये रह गया.

हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन मार्जिन पर दबाव साफ दिख रहा है. EBITDA मार्जिन में भी गिरावट आई है, जिसने निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया. HUL जैसी बड़ी कंपनी का लुढ़कना पूरे बाजार के सेंटिमेंट को नीचे ले आया.

4. मुनाफावसूली ने किया घी का काम

पिछले चार दिनों से बाजार में लगातार तेजी देखी जा रही थी. निफ्टी 26,000 के स्तर को पार कर चुका था. ऐसे में, ऊपरी स्तरों पर ट्रेड्स ने अपना मुनाफा (Profit Booking) घर ले जाना बेहतर समझा. बाजार के जानकारों का कहना है कि निफ्टी का 25,900 के नीचे आना एक कमजोर संकेत है.

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, अगर निफ्टी 25,800 के नीचे बना रहता है, तो आने वाले दिनों में और गिरावट या कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है. जब तक कोई बड़ी सकारात्मक खबर नहीं आती, बाजार एक सीमित दायरे में ही कारोबार करता दिखेगा.

5. मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन ने भी निवेशकों को डराया हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते को लेकर कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम पर लगाम नहीं लगाता, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है.

उधर, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हमास और हिजबुल्लाह) पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं. युद्ध या तनाव की कोई भी खबर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है.

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