
शाहिद कपूर
बॉलीवुड में कई सितारे ऐसे रहे हैं, जिनका करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा. कोई पहली ही फिल्म से सुपरस्टार बन जाता है, तो किसी को अपनी असली पहचान बनाने में सालों लग जाते हैं. शाहिद कपूर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. चॉकलेटी बॉय इमेज से शुरुआत करने वाले शाहिद ने इंडस्ट्री में कदम तो 2003 में रखा, लेकिन अपनी पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म देने में उन्हें पूरे 15 साल लग गए. बाद में जब वो ब्लॉकबस्टर आई, तो उसमें हीरो होते हुए भी वो कहीं न कहीं हीरोइन और विलेन के आगे फीके पड़ते नजर आए.
शाहिद कपूर ने फिल्म ‘इश्क विश्क’ से साल 2003 में डेब्यू किया था और पहली ही फिल्म से उन्होंने यंग ऑडियंस के दिल में जगह बना ली. उनकी क्यूटनेस, डांसिंग स्किल और रोमांटिक अंदाज ने उन्हें जल्दी ही दर्शकों के बीच लवर बॉय का टैग दे दिया. इसके बाद विवाह, जब वी मेट जैसी फिल्मों ने उनकी पॉपुलैरिटी को और मजबूत किया. खासकर ‘जब वी मेट’ में आदित्य कश्यप के किरदार ने उन्हें लोगों के बीच एक अलग पहचान दी. हालांकि, इस फिल्म की सफलता में करीना कपूर का किरदार गीत इतना प्रभावशाली था कि अक्सर चर्चा उसी की ज्यादा हुई.
लंबे वक्त तक किया स्ट्रगल
करियर के शुरुआती सालों में शाहिद ने कई रोमांटिक और हल्की-फुल्की फिल्में की. बाद में उन्होंने अलग तरह के किरदारों को चुनना शुरू कर दिया, शाहिद कमीने और हैदर जैसी फिल्मों से खुद को एक गंभीर एक्टर के तौर पर बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश की. हैदर में उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हुई और उन्हें अवॉर्ड भी मिले, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्में ब्लॉकबस्टर का तमगा हासिल नहीं कर पाईं.
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15 साल बाद मिली पद्मावत
फिर आया साल 2018, जब संजय लीला भंसाली की भव्य फिल्म पद्मावत रिलीज हुई. ये फिल्म अपने ऐलान के समय से ही विवादों में घिरी रही. रिलीज से पहले ही देशभर में प्रदर्शन और विरोध देखने को मिला. लेकिन, जब फिल्म सिनेमाघरों में पहुंची, तो उसने कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए. पद्मावत शाहिद कपूर के करियर की पहली 300 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली फिल्म बनी और उन्हें आखिरकार एक ब्लॉकबस्टर का स्वाद मिला.

नहीं रहे सेंटर ऑफ अट्रैक्शन
फिल्म में शाहिद ने मेवाड़ के राजा महारावल रतन सिंह का किरदार निभाया था. वो एक साहसी, सम्मानित और आदर्शवादी राजपूत राजा के रूप में नजर आए. उनके किरदार में शालीनता, वीरता और त्याग का भाव था. लेकिन, फिल्म की पूरी चमक-दमक के बीच उनका रोल कुछ हद तक सीमित नजर आया. कहानी का सेंटर ऑफ अट्रैक्शन रानी ‘पद्मावती’ और अलाउद्दीन खिलजी के इर्द-गिर्द ज्यादा घूमता दिखा. दीपिका पादुकोण ने रानी ‘पद्मावती’ के रूप में अपनी खूबसूरती और गरिमा से दर्शकों को प्रभावित किया.

दबा हुआ लगा शाहिद का रोल
वहीं रणवीर सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी के किरदार में जो कमाल की एनर्जी, क्रूरता और पागलपन दिखाया, उसने फिल्म का पूरा माहौल बदल दिया. रणवीर की एक्टिंग इतनी दमदार थी कि कई दर्शकों ने उन्हें फिल्म का असली हीरो तक कह दिया. उनके सामने शाहिद का शांत और संयमित किरदार थोड़ा दबा हुआ महसूस हुआ. स्क्रीन टाइम और ड्रामेटिक पलों के मामले में रणवीर और दीपिका को ज्यादा स्पेस मिला. यही वजह रही कि ब्लॉकबस्टर फिल्म का हिस्सा होने के बावजूद शाहिद कपूर को वो व्यक्तिगत चमक नहीं मिल पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी.

पद्मावत की कमाई
पद्मावत की कमाई की बात की जाए, तो इस फिल्म ने 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी. पद्मावत की सफलता के बाद शाहिद ने अपने करियर की दिशा और स्पष्ट की. 2019 में आई कबीर सिंह ने उन्हें एक सोलो ब्लॉकबस्टर स्टार के रूप में दिया. इस फिल्म में वह पूरी तरह सेंटर में थे और बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने जबरदस्त कमाई की. कबीर सिंह की सक्सेस ने यह साबित कर दिया कि शाहिद सिर्फ मल्टीस्टारर फिल्मों पर निर्भर अभिनेता नहीं हैं, बल्कि अपने दम पर भी भीड़ खींच सकते हैं.






