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Premanand Maharaj: हर हाल में खुश कैसे रहें? प्रेमानंद महाराज ने खोला राज

Premanand Maharaj: हर हाल में खुश कैसे रहें? प्रेमानंद महाराज ने खोला राज
Premanand Maharaj: हर हाल में खुश कैसे रहें? प्रेमानंद महाराज ने खोला राज

प्रेमानंद महाराज

Premanand Maharaj Teachings: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है, लेकिन तनाव, चिंता और जिम्मेदारियों के कारण स्थायी खुशी मिलना मुश्किल हो जाता है. इसी विषय पर जब एक भक्त ने संत प्रेमानंद महाराज से पूछा कि जीवन में हर समय प्रसन्न रहने का क्या उपाय है, तो उन्होंने बेहद सरल और आध्यात्मिक मार्ग बताया. प्रेमानंद महाराज के अनुसार, सच्ची खुशी बाहरी चीजों में नहीं, बल्कि भगवान से जुड़ाव और सही जीवनशैली अपनाने में छिपी होती है.

चित्तवृत्ति को भगवान से जोड़ें

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, असली आनंद हमारे भीतर है, बाहर की चीजों में नहीं. उन्होंने बताया कि जब हमारी चित्तवृत्ति यानी मन का ध्यान भगवान के नाम, उनके रूप, लीला या उनके गुणों से जुड़ी रहती है, तभी हमें उस आंतरिक आनंद का अनुभव होता है जो कभी खत्म नहीं होता.

सांसारिक सुख बनाम वास्तविक आनंद

अक्सर हम सोचते हैं कि ज्यादा पैसा, बड़ा पद या सुख-सुविधाएं हमें खुशी देंगी. इस पर महाराज जी कहते हैं, सांसारिक संपत्ति और उन्नति से जो खुशी मिलती है, उसका अंत आखिर में शोक (दुख) में होता है. वास्तविक और स्थायी आनंद केवल भगवान के चरणों के चिंतन में ही छिपा है.

नाम जप की अचूक शक्ति

प्रेमानंद महाराज ने नाम जप को सबसे बड़ा हथियार बताया है. उन्होंने कहा, चाहे मन लगे या न लगे, भाव हो या न हो, बस निरंतर नाम जप करते रहें. उनका मानना है कि अगर आप अपने कर्तव्यों को निभाते हुए साथ में भगवान का नाम जपते हैं, तो जीवन के अंतिम समय में आपको कोई पछतावा नहीं होगा.

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शरीर के प्रति मोह का त्याग

हमारा अधिकांश दुख शरीर और उससे जुड़े रिश्तों के प्रति अत्यधिक मोह के कारण होता है. प्रेमानंद महाराज के अनुसार, निरंतर प्रसन्नता के लिए शरीर के प्रति इस राग या मोह को छोड़ना जरूरी है. यह केवल सत्संग, विवेक और हरि भजन के जरिए ही संभव हो सकता है.

कर्म को ही मानें सेवा

प्रेमानंद महाराज ने कर्मयोग पर जोर देते हुए कहा कि आप जो भी काम कर रहे हैं चाहे वह नौकरी हो, व्यापार हो या समाज सेवा, उसे भगवान की सेवा मानकर करें. प्रसन्न रहने के लिए जीवन से छल-कपट, बेईमानी और अधर्म का पूरी तरह त्याग करना अनिवार्य है.

मृत्यु की तैयारी और भजन की अटैची

प्रेमानंद महाराज ने एक बहुत ही प्रेरणादायक बात कही. उन्होंने बताया कि वे खुद भी शारीरिक कष्टों और मृत्यु से लड़ रहे हैं, लेकिन फिर भी प्रसन्न हैं. उन्होंने कहा, मेरी अटैची फुल है. उनका सुझाव है कि मृत्यु कभी भी आ सकती है, इसलिए अपना समय फालतू के मनोरंजन में बर्बाद करने के बजाय भगवत स्मरण में लगाएं ताकि आप हर समय बेखौफ और खुश रह सकें.

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