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Ekadashi Vrat: एकादशी व्रत में चावल खाना क्यों है वर्जित? जानें पौराणिक कथा

Ekadashi Vrat: एकादशी व्रत में चावल खाना क्यों है वर्जित? जानें पौराणिक कथा
Ekadashi Vrat: एकादशी व्रत में चावल खाना क्यों है वर्जित? जानें पौराणिक कथा

एकादशी पर चावल क्यों वर्जित

Ekadashi Vrat Mein Chawal Kyon Nahin Khana Chahie: एकादशी तिथि बहुत पवित्र और विशेष मानी जाती है. ये तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित की गई है. एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अराधना और व्रत किया जाता है. हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु को समर्पित ये व्रत किया जाता है. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी 13 फरवरी को है. ये विजया एकादशी रहेगी.

एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन और व्रत करने से जीवन के सारे कष्ट कट जाते हैं. व्रत के प्रभाव से मृत्यु के बाद मोक्ष और बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है, लेकिन एकादशी व्रत बहुत कठिन है. कई नियमों का पालन करते हुए ये व्रत रखा जाता है. इस व्रत में चावल का सेवन तो भूलकर भी नहीं किया जाता. एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा है. आइए जानते हैं.

कथा के अनुसार…

पुराणों में वर्णित कथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने अपना शरीर त्याग दिया. इसके बाद उनके शरीर के अंश धरती के भीतर समाहित हो गए. जिस स्थान पर महर्षि मेधा के शरीर के अंश गिरे, वहां वहां से जौ और चावल पैदा हुआ. चूंकि ये अनाज महर्षि के शरीर के अंश से उत्पन्न हुए थे, इसलिए इन्हें ‘जीव’ के समान माना गया.

एकादशी पर चावल खाने से पुण्य होते हैं नष्ट

मान्यता है कि एकादशी के दिन ये अनाज सजीव रूप में होते हैं. इसीलिए, इस दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस के सेवन के समान बताया गया है. पद्म पुराण और विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में कहा गया है कि जो लोग एकादशी के दिन चावल का सेवन करते हैं, उनके जीवन के सारे पुण्य फलों का नाश हो जाता है. इसी वजह से एकादशी के दिन चावल का सेवन करने से मना किया जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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